-नियोजकों पर होगी एफआईआर और भारी जुर्माना
रंजीत कुमार विद्यार्थी
मुंगेर : श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के तत्वावधान में सोमवार उप श्रम आयुक्त कार्यालय, मुंगेर द्वारा बाल श्रम उन्मूलन को लेकर एक बड़ी कार्रवाई की गई। सदर मुंगेर प्रखंड के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी विक्रम कुमार के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन कर मुंगेर के विभिन्न दुकानों, प्रतिष्ठानों, होटलों, रेस्टोरेंटों, मॉल और गैराजों में सघन जांच अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के दौरान धावा दल ने कासिम बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठानों से दो बाल श्रमिकों को सफलतापूर्वक विमुक्त (मुक्त) कराया। मुंगेर के श्रम अधीक्षक दिलीप कुमार झा ने बताया कि बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान पूरे जिले में लगातार चलाया जाएंगा। उन्होंने बताया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक कुल 20 बाल श्रमिकों को मुंगेर जिलांतर्गत विभिन्न जगहों से मुक्त कराया जा चुका है।
नियोजकों पर होगी एफआईआर और भारी जुर्माना
श्रम अधीक्षक के अनुसार, मुक्त कराए गए बच्चों से काम लेने वाले नियोजकों (मालिकों) के खिलाफ ‘बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986’ के तहत संबंधित थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि
बच्चों से प्रतिष्ठानों में कार्य कराना पूरी तरह से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है।
दोषी नियोजकों को ₹20,000 से लेकर ₹50,000 तक का जुर्माना या दो वर्षों तक का कारावास (जेल) अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।
इसके अतिरिक्त, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में नियोजक से ₹20,000 की अतिरिक्त राशि वसूली जाएगी।
बाल गृह भेजे गए बच्चे
धावा दल द्वारा विमुक्त कराए गए दोनों बाल श्रमिकों को मुंगेर बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थापित (पेश) किया गया, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित बाल गृह में भेज दिया गया है।
धावा दल में ये रहे शामिल
इस सफल कार्रवाई में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (सदर मुंगेर) विक्रम कुमार के साथ श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (धरहरा) हिमांशु रंजन, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (बरियारपुर) अनिकेत, पैरा लीगल वालंटियर (PLV) पिंकी कुमारी, परिवार विकास NGO के सदस्य तथा स्थानीय पुलिस बल के जवान मुख्य रूप से शामिल थे।
