रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हजारीबाग में मंगला जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर लगी रोक और प्रशासनिक कार्रवाई का मुद्दा गुरुवार को भी गरमाया रहा। भाजपा विधायकों ने जिला प्रशासन द्वारा डीजे जब्त किये जाने के विरोध में सदन परिसर में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने केवल डीजे विवाद ही नहीं, बल्कि किसानों से धान खरीद में हो रही देरी और सरकारी राशन वितरण में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर भी सरकार को घेरा। धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाते हुए बाबूलाल मरांडी ने लाउडस्पीकर और डीजे के नियमों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को सुबह साढ़े चार बजे लाउडस्पीकर से होने वाली अजान से कोई परहेज नहीं है, जबकि रामनवमी जैसे त्योहारों पर बजने वाले डीजे को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर जब्त किया जा रहा है। मरांडी ने तर्क दिया कि कोर्ट का आदेश रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर न बजाने का है, लेकिन सरकार इसे चुनिंदा तरीके से लागू कर रही है। उन्होंने इसे सरकार की भेदभावपूर्ण मानसिकता का परिचायक बताया।
झारखंड विधानसभा में गूंजा धान खरीद का मुद्दा
धीमी रफ्तार और 10 किलो की कटौती पर विपक्ष का जोरदार हंगामा
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को धान खरीद की धीमी रफ्तार और इसमें हो रही अनियमितताओं को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। विधायक अरुप चटर्जी ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया कि राज्य में धान खरीद का लक्ष्य छह लाख मीट्रिक टन तय किया गया है, लेकिन अब तक केवल तीन लाख मीट्रिक टन की ही खरीदारी हो पायी है। उन्होंने प्रखंड स्तर पर पैक्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्र सुचारू रूप से काम ही नहीं कर रहे हैं, तो लक्ष्य को समय पर पूरा करना नामुमकिन नजर आता है।
सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया कि मैनपावर की कमी और गोदामों के अलग-अलग स्थानों पर होने के कारण प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि इस बार सरकार पहली बार ‘वन टाइम पेमेंट’ की सुविधा दे रही है और यदि जरूरत पड़ी, तो धान खरीद की अंतिम तिथि 31 मार्च से आगे भी बढ़ायी जायेगी। हालांकि, विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार की रणनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि खरीदारी को मार्च तक खींचना सीधे तौर पर बिचौलियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार को यह प्रक्रिया जनवरी तक ही पूरी कर लेनी चाहिए थी और उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में हो रही खरीद पर भी सवाल उठाये।
इसी चर्चा में विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने विभागीय कमियों को उजागर करते हुए बताया कि राज्य में कुल 4408 पैक्स और लैंपस मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 700 से 800 का ही उपयोग हो रहा है। उन्होंने बेहतर मैपिंग के जरिये इन केंद्रों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया। वहीं, विधायक हेमलाल मुर्मू ने किसानों के साथ हो रहे अन्याय का मुद्दा उठाते हुए कहा कि धान खरीद के दौरान प्रति क्विंटल 10 किलो की कटौती की जा रही है, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों के हित में इस कटौती को तुरंत रोका जाये और एक स्पष्ट नीति बनायी जाये।
