रिपोर्ट – प्रमोद कुमार सिंह
ओबरा प्रखंड के राजकीय तिलक मध्य विद्यालय खुदवा जाने के लिए रास्ता नही है। सरकारी विद्यालय की यह सबसे बड़ी विडंबना है। कलेन पथ से विद्यालय जाने के लिए महज 400 सौ मीटर की दूरी पर यह विद्यालय अवस्थित है। परंतु विद्यालय जाने के लिए शिक्षक छात्र एवम अभिभावक खेतों की मेढ का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों मे चारों तरफ पानी भर जाता है। समस्या भयावह हो जाती है। रास्ता कीचड़ मे तब्दील के होने कारण छात्र छात्राएं शिक्षक कई बार गिर जाते है। ऐसी हालत मे शिक्षक छोटे बच्चों को बैग स्वयं उठकर उन्हें सुरक्षित विद्यालय तक पहुंचाने का प्रयास करते है। ग्रामीणों की माने तो यह विद्यालय काफी पुराना होने के बाद भी रास्ता का निर्माण नही हो सका है। ग्रामीणों की माने विद्यालय के चारों तरफ से निजी खेत है। आज तक संपर्क मार्ग का निर्माण नही हो पाया है। बरसात के मौसम मे विद्यालय चारों तरफ पानी से घिर जाता है और कही सूखा भी है तो ,कीचड़ से फिसलन हो जाने के स्तिथि मे अभिभावक भी छात्रों को नहीं भेजते है। इस विद्यालय मे छात्रों की संख्या 523 है। और 450 के आस पास छात्रों की संख्या विद्यालय पहुंचते है। यहां छात्रों की अनुपात मे कमरों की कमी हैं । कमी रहने के कारण धक्कम धूखी मे क्लास करते है। शिक्षकों की माने तो यहां चार कमरों की अति आवश्यकता है। शिक्षकों की संख्या भी 12 बताई गई है। प्रधानाध्यापक लव कुमार ने बताया कि,विद्यालय के चारों तरफ निजी जमीन होने के कारण रास्ते की समस्या गंभीर बनीं हुई है। इस सम्बन्ध में संबंधित पदाधिकारियों की कई बार सूचना दी गई। परंतु अब तक समाधान नही निकल सका है। उन्होंने बताया कि, इसकी समस्या की समाधान आस पास के सहयोग से ही संभव हो सकेगा । बहरहाल आने जाने का रास्ता कीचड़नुमा बन गया है। छात्र डरे सहमे विद्यालय पहुंच रहे है। ग्रामीणों की माने तो जिस विद्यालय से बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है । वहां आज सबसे बड़ी समस्या विद्यालय तक पहुंचने की है । प्रशासन को इस समस्या का अस्थाई समाधान निकालना होगा। ताकि बरसात के मौसम मे बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
मेढ के सहारे स्कूल पहुंचते है छात्र और शिक्षक, रास्ता नहीं होने से बरसात के दिनो मे शिक्षण कार्य होती है प्रभावित
