इस्लामाबाद। पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित बलोचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा के बाहरी सोरंगे इलाके में एक कोयला खदान के भीतर भीषण विस्फोट होने से कम से कम 34 खनिकों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) के अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह जानकारी दी कि विस्फोट के बाद पूरी कोयला खदान ढह गई, जिसके मलबे से छह और नए शव बरामद होने के बाद मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 34 हो गई है। सुरंग के भीतर फंसे दर्जनों अन्य खनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव कर्मियों द्वारा युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
इस दुखद हादसे पर संज्ञान लेते हुए बलोचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने घटना की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और चेतावनी दी है कि यदि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती गई तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को पूरे प्रांत की सभी कोयला खदानों में सुरक्षा नियमों को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है। खान एवं खनन मंत्री शोएब नोशिरवानी ने बताया कि अत्यधिक कठिन परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं और खदान में फंसे अन्य कर्मचारियों तक पहुंचने के लिए तमाम संसाधनों का पूरा उपयोग किया जा रहा है। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को तीन-तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
कोयला खदान के मालिक कुर्बान जोगेजई ने इस भयानक दुर्घटना की वजह मीथेन गैस का रिसाव और उसके कारण हुआ विस्फोट बताया है। उन्होंने पुष्टि की कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त खदान के अंदर कुल 42 मजदूर काम कर रहे थे, और फंसे हुए सभी लोग मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा के शांगला जिले के रहने वाले थे। इसके अलावा, पुलिस ने बताया कि गुरुवार को ही बलोचिस्तान के हरनाई जिले में एक अन्य कोयला खदान दुर्घटना में भी एक मजदूर की जान चली गई थी। गौरतलब है कि बलोचिस्तान और सिंध प्रांतों में सुरक्षा के पर्याप्त उपायों की कमी और बेहद खराब कामकाजी परिस्थितियों के कारण इस तरह की कोयला खदान दुर्घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं, जिससे पहले भी सिंध के थट्टा जिले के कोहिस्तानी बेल्ट स्थित इब्राहिम कोल माइंस में दीवार ढहने से चार मजदूरों की मौत हो चुकी है।
