शहडोल से राजेश कुमार यादव
गोहपारू जनपद में अधिकारियों की नाक के नीचे शासकीय धन की खुली डकैती; 4 किमी की सड़क पर डामर के नाम पर सिर्फ ‘काला रंग’ पोता, पहली परीक्षा में ही खुली भ्रष्टाचार की पोल, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
गोहपारू। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ‘प्रधानमंत्री जनमन योजना’ को गोहपारू जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार का घुन लग चुका है। आदिवासियों और पिछड़े ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बनाई जा रही करोड़ों की सड़कें, विभाग के इंजीनियरों और ठेकेदार की जुगलबंदी के कारण बनने से पहले ही जमींदोज होने लगी हैं।
ताजा और सबसे शर्मनाक मामला ग्राम सगरा से भाजीखेरवा तक बन रही 4 किलोमीटर लंबी डामर सड़क का है। इस मार्ग का निर्माण ए.के. मिश्रा कंस्ट्रक्शन नामक एजेंसी द्वारा किया जा रहा है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता की इस कदर धज्जियां उड़ाई गई हैं कि सड़क अभी पूरी तरह चालू भी नहीं हुई है और बीच-बीच में से पूरी तरह टूटकर बिखर चुकी है। डामर की परतें हाथ लगाते ही पपड़ी की तरह उखड़ रही हैं, जो साफ बयां कर रहा है कि गिट्टी और डामर के अनुपात में भारी हेरफेर किया गया है।
5 साल की गारंटी… या 5 दिन का छलावा
इस पूरे खेल की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यह है कि अनुबंध के नियमों के मुताबिक, ठेकेदार ए.के. मिश्रा कंस्ट्रक्शन पर इस सड़क को लेकर 5 साल की परफॉर्मेंस गारंटी लागू होती है। नियम कहता है कि 5 साल तक सड़क पर एक कंकड़ भी उखड़ा तो जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। लेकिन यहाँ तो अंधी मची है! जो सड़क 5 महीने या 5 दिन भी सही सलामत नहीं रह सकी, उसके नाम पर 5 साल की गारंटी का बोर्ड लगाना जनता और शासन के साथ सीधा धोखा है। आखिर किस भरोसे पर तकनीकी अधिकारियों ने इस घटिया काम को मूक सहमति दी
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी
सगरा और भाजीखेरवा के ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ठेकेदार के सुपरवाइजर से काम के दौरान भी घटिया निर्माण की शिकायत की थी, लेकिन रसूख के दम पर ग्रामीणों की आवाज को दबा दिया गया। अब जब सड़क बीच से टूट चुकी है, तो ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच नहीं हुई और सड़क को उखाड़कर दोबारा सही मानकों पर नहीं बनाया गया, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
भ्रष्टाचार की गंध से घिरे जिम्मेदार अधिकारी
सूत्रों की मानें तो इस 4 किलोमीटर की सड़क में केवल ऊपरी सतह पर डामर चमकाया गया है, जबकि नीचे का बेस (सड़क की बुनियाद) पूरी तरह से कमजोर है। यही कारण है कि भारी वाहनों का दबाव तो दूर, सामान्य आवागमन में ही रोड बीच से धंस गई है। मामले में जनपद पंचायत गोहपारू के जिम्मेदार तकनीकी अमले की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है, जिन्होंने मौके पर जाकर काम रोकना उचित नहीं समझा।
इनका कहना है
टूट गया तो मै क्या करू मै कुछ नही कर सकता है जो रोड बनाना था वो बन गया है
ठेकेदार ए , के मिश्रा
