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जयसिंहनगरः पेट्रोल पंप पर ‘डिजिटल’ बहानेबाजी और कमीशन का खेल गर्भवती महिला को रोककर बोले कर्मचारी- ” ओटीपी ना कर पाएंगे न नकद दो तभी देंगे डीजल

जयसिंहनगरः पेट्रोल पंप पर ‘डिजिटल’ बहानेबाजी और कमीशन का खेल गर्भवती महिला को रोककर बोले कर्मचारी- ” ओटीपी ना कर पाएंगे न नकद दो तभी देंगे डीजल

शहडोल से राजेश कुमार यादव

क्या मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सेवाएं और मानवीय संवेदनाएं अब पेट्रोल पंप पर कर्मचारी ओटीपी करने को तैयार नहीं और ‘कैश’ की गुलाम हो गाए हैं? शहडोल जिले के जयसिंहनगर में एक ऐसी घटना घटी है, जिसने न केवल प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम एक सभ्य समाज में रह रहे हैं?

मौत से जंग लड़ती महिला और ‘पत्थर’ बने कर्मचारी

मामला तब शुरू हुआ जब ग्राम पेढरा से चेकब के लिए एक गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए उसे जिला अस्पताल शहडोल ले जाया ज रहा था एंबुलेंस क्रमांक CG 04 NT 1841 चालक शैलेश शर्मा ने महिला को लेकर जिला अस्पताल की ओर रवाना हुए थे लेकिन गाड़ी में ईंधन की कमी के कारण वह स्थानीय भारत पैट्रोलियम पेट्रोल पंप खुशरवाह जयसिंहनगर पर रुके थे यहाँ जो हुआ, वह कि आपराध से कम नहीं है।

संवेदनहीनता की पराकाष्ठाः एंबुलेंस में महिला पीड़ा से चीख रही थी, लेकिन पंप कर्मचारी “ओटीपी करने को तैयार नहीं थे

अवैध वसूली की कर्मचारियों ने खुलेआम कहा कि “डीजल चाहिए तो नकद (Cash) पैसा दो, वरना नहीं मिलेगा।” सरकारी कार्ड और ऑनलाइन प्रक्रिया के बजाय नकद की मांग ने पंप प्रबंधन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक घंटा भारी पड़ाः पूरे एक घंटे तक एंबुलेंस खड़ी रही। पायलट मिन्नतें करता रहा, परिजन रोते रहे, लेकिन कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा।

पायलट का ‘स्टिंग ऑपरेशन’ वीडियो ने खोली पोल

जब पानी सिर के ऊपर से गुजर गया, तो एंबुलेंस पायलट ने मोबाइल निकालकर इस पूरी बेशर्मी को कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में कर्मचारियों की दबंगई और सरकारी नियमों का मजाक उड़ाते हुए साफ देखा जा सकता है। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की ‘ल रहा है और सीधे शहडोल कलेक्टर और एस. चुनौती दे रहा है।

प्रशासन से सीधे सवालः

1.ग्रीन कॉरिडोर का क्या हुआ?: क्या एक रेफरल एंबुलेंस

को भी पेट्रोल पंपों पर नकद या तकनीकी कारणों से एक घंटे तक रोकना कानूनी अपराध नहीं है?

2.लाइसेंस रद्द क्यों न हो?: जिस पंप पर जीवन रक्षक

वाहनों को प्राथमिकता नहीं दी जाती, उसे संचालित करने का अधिकार किसने दिया ?

3.भ्रष्टाचार की जांच: सरकारी एंबुलेंस के डीजल कार्ड होने

के बावजूद नकद पैसों की मांग करना क्या किसी बड़े भ्रष्टाचार का हिस्सा है?

अब कार्रवाई का इंतजार

यह खबर केवल एक सूचना नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। अगर एक गर्भवती महिला की जान को खतरे में डालने वाले इन कर्मचारियों और पंप मालिक पर कठोरतम कार्रवाई (FIR) नहीं होती, तो भविष्य में कोई भी एंबुलेंस सुरक्षित नहीं होगी।

इनका कहना है

1.हमने एक घंटा तक पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से बोला कि डीजल दे दीजिए तो भी डीजल नहीं मिला हम गर्भवती महिला को ग्राम पेढरा से शहडोल ले जा रहे थे कर्मचारियों ने ओटीपी करने को तैयार नहीं थे बोले नगद लेना पड़ेगा डीजल
वर्तमान पायलट शैलेश शर्मा

2. हां बात सही है डीजल नहीं मिला है काफी लाइन में लगे थे उस समय ड्यूटी पर शर्मा जी थे मैं वहीं पर था मैं भी बोला कर्मचारियों से लेकिन डीजल नहीं मिला मेरी ड्यूटी हो हुई थी

पायलट अशोक यादव

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