TSPC के 8 उग्रवादियों सहित आदिल अंसारी गिरफ्तार

प्रवक्ता कर्मवीर जी की प्रेस विज्ञप्ति में अचम्भित करने वाले दावे, कोई संबंध नहीं?

संवाददाता

झारखंड। हजारीबाग जिले में पुलिस ने हाल ही में संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के 8 सक्रिय सदस्यों को हथियारों सहित गिरफ्तार किया, जो ठेकेदारों और व्यापारियों से वसूली की योजना बना रहे थे। इन गिरफ्तारियों ने क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सतर्कता को रेखांकित किया है।

गिरफ्तारियां: तथ्य और विवरण

16-17 मार्च 2026 को हजारीबाग पुलिस ने लातेहार जिले के बालुमाथ थाना क्षेत्र के सिरम और केरी गांवों से सुरेंद्र मुंडा (30 वर्ष), लाल मोहन मुंडा (22 वर्ष), सत्येंद्र गंझू उर्फ संतू (25 वर्ष), रविंद्र गंझू उर्फ रिंकु (19 वर्ष), बिरेंद्र मुंडा (20 वर्ष), सुनिल मुंडा (27 वर्ष), अनिल मुंडा (18 वर्ष) और रांची के मैक्लुस्कीगंज के संजय मुंडा (34 वर्ष) को गिरफ्तार किया।

पुलिस को इनके पास से 2 इंसास राइफल, 170 गोलियां, देसी पिस्टल, बोलेरो वाहन और 7 मोबाइल फोन बरामद हुए, जो इनकी आपराधिक गतिविधियों की पुष्टि करते हैं। ये सभी आरोपी रिश्तेदार बताए जाते हैं और बड़ी घटनाओं को अंजाम देने की तैयारी में थे।

रामगढ़ गोलीबारी घटना से कोई संबंध नहीं?

प्रतिबंधित संगठन (टीएसपीसी) के प्रवक्ता कर्मवीर जी की एक प्रेस विज्ञप्ति में यह दावा किया गया है कि ये युवक निर्दोष हैं तथा रामगढ़ जिले के पतरातु सरैया टोला में नितेश और गज्जु साव के घर हुई गोलीबारी से उनका कोई लेना-देना नहीं हैं। हालांकि, पुलिस के अनुसार ये TSPC के सदस्य थे और संगठन की ओर से वसूली व हिंसा की साजिश रच रहे थे। संगठन ने जिम्मेदारी जोनल सदस्य निर्भय जी पर डाली है।

अन्य गिरफ्तारियां और संगठन का खंडन

27 फरवरी 2026 को रांची पुलिस ने TSPC के सब-जोनल कमांडर आदिल अंसारी उर्फ देवा को लोहरदगा से गिरफ्तार किया, उसके पास से मोबाइल, राउटर और पर्चे बरामद हुए। प्रेस विज्ञप्ति में आदिल को संगठन से असंबद्ध बताया गया, साथ ही पूर्व सदस्य भिखन गंझू और दिनेश उर्फ रवि राम का भी बचाव किया गया। संगठन ने पुलिस पर निर्दोषों को फंसाने का आरोप लगाया, लेकिन आधिकारिक रिपोर्ट्स इन गिरफ्तारियों को उपलब्धि मान रही हैं।

पुलिस की लंबी कार्रवाई का सिलसिला

झारखंड पुलिस वर्षों से TSPC जैसे संगठनों के खिलाफ अभियान चला रही है, जिसमें हथियार बरामदगी और वसूली रोकना प्रमुख है। ये घटनाएं स्थानीय सुरक्षा को मजबूत करने का संकेत देती हैं, भले ही संगठन इन्हें राजनीतिक साजिश करार दे।

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