गिरफ्तारी के बाद भी नहीं थम रहा सिलसिला,
देवघर से संवाददाता प्रेम रंजन झा
देवघर। झारखंड का देवघर जिला एक बार फिर साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का गवाह बना है। ताजा मामले में साइबर थाना, देवघर ने छापेमारी कर 04 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। लेकिन पुलिस की इन लगातार कार्रवाइयों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है— क्या युवाओं में कानून का डर खत्म हो गया है?
कैसे देते थे ठगी को अंजाम? (Modus Operandi)
पकड़े गए अपराधी डिजिटल इंडिया के इस दौर में मासूम लोगों की मेहनत की कमाई लूटने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे थे:
PM-Kisan योजना के नाम पर: फर्जी लिंक भेजकर किसानों को झांसा देना।
फेक कस्टमर केयर: PhonePe और Paytm का अधिकारी बनकर ‘कैशबैक’ का लालच देना और गिफ्ट कार्ड रिडीम कराना।
लोन का झांसा: धानी फाइनेंस (Dhani Finance) का अधिकारी बनकर लोन दिलाने के नाम पर ठगी।
Airtel Payment Bank: कार्ड बंद होने का डर दिखाकर और उसे चालू करने के बहाने गोपनीय जानकारी चुराना।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की उम्र चौंकाने वाली है, जो यह दर्शाती है कि युवा पीढ़ी किस कदर गुमराह हो रही है:
नीरज कुमार (18 वर्ष) – देवघर।
खालिद अंसारी (23 वर्ष) – पालाजोरी।
सुभानी अंसारी (24 वर्ष) – पालाजोरी।
सोहराब अंसारी (36 वर्ष) – मधुपुर।
पुलिस ने इनके पास से 06 मोबाइल फोन, 08 सिम कार्ड और 02 फर्जी सिम बरामद किए हैं।
समाज और जागरूकता की आवश्यकता: अब जागना होगा!
हर दिन 2, 4 या 10 की संख्या में हो रही ये गिरफ्तारियां सिर्फ पुलिस की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए एक अलार्म है।
”शॉर्टकट से पैसा कमाने की चाहत युवाओं को सलाखों के पीछे धकेल रही है।”
क्या करने की है जरूरत?
पारिवारिक निगरानी: माता-पिता को यह देखने की जरूरत है कि उनका बेरोजगार बेटा महंगे मोबाइल और अचानक बढ़ते खर्चों के लिए पैसे कहाँ से ला रहा है।
शिक्षा और रोजगार: केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि युवाओं को नैतिक शिक्षा और सही कौशल (Skill Development) से जोड़ना होगा ताकि वे अपराध की ओर न मुड़ें।
