लखीसराय कजरा
डॉ. आर लाल गुप्ता
मालदा रेल डिवीजन अंतर्गत जमालपुर किऊल रेल खंड में कजरा रेलवे स्टेशन रेल प्रशासन के द्वारा उपेक्षा का शिकार है।
बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार जमालपुर किऊल के बीच कजरा एवं धरहरा रेलवे स्टेशन सबसे पुराना है। बावजूद इसके यहां अनेक महत्वपूर्ण ट्रेन का ठहराव नहीं है और जो था उसका भी ठहराव वैश्विक महामारी कोरोना काल के बाद हटा लिया गया है जो पुनः बहाल नहीं हुआ। नतीजतन जो जमालपुर किऊल रेल खंड के बीच कजरा में सबसे ज्यादा राजस्व था वह धीरे-धीरे कम होता गया।
कहते हैं बुद्धिजीवी _
इस संबंध में पूछने पर अरमा गांव निवासी बुद्धिजीवी व सामाजिक कार्यकर्ता पवन कुमार ने बताया की धरहरा एवं कजरा रेलवे स्टेशन का निर्माण बर्ष 1884 मे हुआ था।तब सूर्यगढ़ा स्थित गंगा नदी से जल मार्ग के द्वारा विभिन्न प्रकार के सामग्रियां आती थी जिसे निकटवर्ती कजरा रेलवे स्टेशन से रेल मार्ग द्वारा भेजा जाता था।
उस दशक से ही सूर्यगढ़ा कजरा सड़क मार्ग था जो आज भी है।
अगर नहीं कुछ है तो आवश्यक ट्रेन का ठहराव। जिसका प्रभाव कजरा रेलवे स्टेशन में राजस्व की कमी दिख रहा है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय सिंह ने बताया कि ट्रेन ठहराव को को लेकर लोगों का हस्ताक्षर युक्त आवेदन मालदा रेल डिवीजन को अनेकों बार दिया गया परंतु आज तक ठहराव के लिए प्रश्न चिह्न ही लगा हुआ है।
सेवानिवृत शिक्षक जनार्दन मंडल, सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी भारत भूषण यादव, पूर्व मुखिया एस.एस पांडे, आदर्श दुर्गा पूजा समिति कजरा के अध्यक्ष रविंद्र सिंह सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार सिंह लोजपा के हेमंत कुमार कांग्रेस के बंटी कुमार, सन्नी पटेल, चंदन पांडे, दिवाकर झा, पवन झा मदनपुर पंचायत के मुखिया पप्पू मंडल , अरमा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि बैजू कुमार सहित सैकड़ो लोगों ने कजरा में ट्रेनों का ठहराव को पुनः बहाल करने की मांग किया है। जिसके लिए शनिवार को निरीक्षण में आए हुए मालदा रेल डिवीजन के डी आर एम मनीष कुमार गुप्ता को भी आवेदन देकर कजरा में ट्रेनों के ठहराव के लिए मांग किया है। परंतु मिली हुई आश्वासन पर पहल कितना होगा इसका जबाव वक्त के गर्भ में छिपा है।
बहरहाल ट्रेनों के ठहराव की संख्या में गिरावट से ” अस्तगामी की ओर जा रहा है कजरा रेलवे स्टेशन की आमदनी का सुरज” यह कहना बाजिव लगता है।
