Skip to main content

Birsa Times

बारिश से बेपटरी हुई दुर्गा पूजा की रौनक, पंडालों की चमक फीकी पड़ी और दुकानदारों की उम्मीदों पर फिरा पानी

बारिश से बेपटरी हुई दुर्गा पूजा की रौनक, पंडालों की चमक फीकी पड़ी और दुकानदारों की उम्मीदों पर फिरा पानी

रांची। राजधानी रांची में इस बार दुर्गा पूजा का उत्साह बारिश के कारण काफी हद तक फीका पड़ता नजर आ रहा है। शहर में लगभग 176 भव्य दुर्गा पूजा पंडालों का निर्माण किया गया है, जिन्हें आकर्षक रूप देने के लिए करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, लगातार हो रही बारिश ने पंडालों की सजावट से लेकर उनकी रोशनी तक को बुरी तरह प्रभावित किया है। महंगे रंगों से की गई सजावट अब फीकी पड़ने लगी है, और लाइटों से उकेरे गए देवी-देवताओं के आकर्षक स्वरूप व डिजाइन की चमक भी मंद पड़ गई है, जिसका सीधा असर पंडालों में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही पर भी पड़ा है। यह खराब मौसम सिर्फ आस्था और उल्लास को ही प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि हजारों छोटे दुकानदारों के कारोबार के गणित को भी पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। दुर्गा पूजा को देश का एक ऐसा बड़ा पर्व माना जाता है जो न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि छोटे कारोबारियों के लिए कमाई का एक बड़ा अवसर भी होता है। इसी उम्मीद के साथ दुकानदारों ने अपनी जमा पूंजी और उधार लेकर पंडालों के आसपास खाने-पीने के स्टॉल सजाए हैं। किसी ने अंडे और चाउमीन की दुकान लगाई है, तो कोई चिल्ली, छोले-भटूरे, स्थानीय व्यंजन धुसका और चाय बेचकर अच्छी आय की आस लगाए बैठा था।

दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने इस त्योहारी सीजन में अच्छी कमाई की उम्मीद में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का निवेश किया है। दुकान लगाने के लिए जगह का किराया चुकाने, साजो-सामान की व्यवस्था करने और कच्चा माल खरीदने पर बड़ी रकम खर्च हो चुकी है। इसके अलावा, कई दुकानदारों ने बिक्री संभालने के लिए अतिरिक्त मजदूरों को भी काम पर रखा था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि पूजा के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ से उनका कारोबार फलेगा-फूलेगा और वे सालभर की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर पाएंगे, लेकिन बारिश के कारण ग्राहकों की आवाजाही थमने से उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि पंडाल परिसरों और आसपास दुकानें लगाने वाले इन छोटे कारोबारियों के सामने अब अपनी लागत (लागत पूंजी) निकालना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। दुकान का किराया, खाद्य सामग्रियों की खरीद, मजदूरों की मजदूरी और अन्य व्यवस्थाओं पर किए गए खर्च की भरपाई उन्हें केवल दैनिक बिक्री से ही करनी थी। यदि बारिश का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो उनका वित्तीय नुकसान और अधिक बढ़ सकता है। ऐसे में, दुर्गा पूजा की इस कमाई के सहारे अपने परिवार के चेहरों पर खुशियां लाने का सपना देखने वाले इन छोटे कारोबारियों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि पूजा पंडालों की रौनक के साथ-साथ उनका मुनाफा भी बारिश की भेंट चढ़ता दिख रहा है।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *