-आदिवासी एक्सप्रेस ब्यूरो अजय कुमार कुशवाहा
-अश्लील वीडियो और गिरफ्तारी का भय दिखाकर ऐंठी रकम, फर्जी कोर्ट में तीन बार कराई पेशी; पश्चिम बंगाल से तीन आरोपी गिरफ्तार
साहिबगंज/बरहरवा, बरहरवा थाना क्षेत्र में साइबर ठगी के अब तक के गंभीर मामलों में से एक का पुलिस ने खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के तीन कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को करीब दो माह तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उसके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज होने, अश्लील वीडियो वायरल होने तथा गिरफ्तारी कर जेल भेजे जाने का भय दिखाकर करीब 1.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में करीब 10 बार आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर कराई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साहिबगंज पुलिस ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित कर बैंक खातों, लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। जांच के क्रम में पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल के पश्चिम वर्द्धमान जिले के दुर्गापुर क्षेत्र में छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल
बरहरवा थाना क्षेत्र निवासी गौतम चंद्र दास के मोबाइल पर जून माह में एक व्यक्ति ने फोन किया। उसने अपना नाम प्रदीप सिंह बताते हुए खुद को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया। कथित अधिकारी ने पीड़ित को बताया कि उसके खिलाफ सीबीआई में गंभीर मामला दर्ज है और जल्द ही उसकी गिरफ्तारी हो सकती है।
इसके बाद साइबर अपराधियों ने लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया। उसे अश्लील वीडियो से जुड़े मामले में फंसाने तथा प्राथमिकी दर्ज होने का भय दिखाया गया। अपराधियों ने उसे विश्वास दिलाया कि यदि वह उनके निर्देशों का पालन करेगा और मांगी गई रकम जमा करेगा तो मामले को समाप्त कराया जा सकता है।
फर्जी कोर्ट रूम बनाकर तीन बार कराई पेशी
साइबर अपराधियों ने ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए एक कदम और आगे बढ़ते हुए वीडियो कॉल पर फर्जी कोर्ट रूम तैयार किया। पुलिस जांच के अनुसार, पीड़ित की कथित तौर पर तीन बार फर्जी सीबीआई कोर्ट में पेशी कराई गई।
वीडियो कॉल के दौरान पीड़ित को लगातार निगरानी में रखने का दावा किया जाता था। उसे बाहर किसी से संपर्क नहीं करने और अपराधियों के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाता था। गिरफ्तारी, जेल, जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उससे लगातार पैसे की मांग की जाती रही।
बेटी की शादी के लिए जमा रकम भी गंवाई
पीड़ित के अनुसार, उसने अपनी बेटी की शादी के लिए काफी मुश्किल से रकम जमा की थी। साइबर अपराधियों के लगातार दबाव और भय के कारण वह उनकी बातों में आता गया और अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करता रहा।
प्रारंभिक पुलिस जांच में सामने आया है कि करीब 10 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से कुल 1.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए गए। बताया गया है कि 20 जून 2026 को 50 लाख रुपये का पहला बड़ा लेनदेन हुआ। इसके बाद अलग-अलग तिथियों में रकम भेजी जाती रही और 24 अगस्त को पांच लाख रुपये का अंतिम लेनदेन किए जाने की बात सामने आई है।
रकम खत्म होने के बाद हुआ ठगी का एहसास
लगातार रकम ट्रांसफर करने के बाद जब पीड़ित के पास पैसे खत्म होने लगे तो उसे पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ। उसने पहले एक रिश्तेदार को मामले की जानकारी दी और बाद में पुलिस से संपर्क किया।
मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने बैंक खातों में हुए लेनदेन और साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच शुरू कर दी। 31 अगस्त 2026 को बरहरवा थाना कांड संख्या 218/26 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
बैंक स्टेटमेंट और तकनीकी साक्ष्यों ने खोली अपराधियों की कड़ी
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट का बारीकी से विश्लेषण किया गया। जिन खातों में ठगी की रकम पहुंची, उनके लेनदेन और खाताधारकों की जानकारी जुटाई गई। इसके साथ ही तकनीकी शाखा की मदद से मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया।
जांच की कड़ियां पश्चिम बंगाल के पश्चिम वर्द्धमान जिले के दुर्गापुर क्षेत्र तक पहुंचीं। इसके बाद पुलिस टीम ने संबंधित ठिकानों पर छापेमारी कर तीन कथित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में—
रंजीत बास्की (28), पिता महादेव बास्की, निवासी बॉम्बे कॉलोनी, दुर्गापुर, जिला पश्चिम वर्द्धमान।
आसित महतो, पिता उत्तम महतो, निवासी आईटीआई गोसाई टोला, थाना एनटीपीसी विधाननगर, जिला पश्चिम वर्द्धमान।
धीरज हारी, पिता बैद्यनाथ हारी, निवासी हुरको, दुर्गापुर विधाननगर, जिला पश्चिम वर्द्धमान शामिल हैं। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
एसआईटी कर रही पूरे नेटवर्क की पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) सह साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। टीम अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
पुलिस बैंक खातों में रकम के अंतिम प्रवाह, मोबाइल नंबरों, डिजिटल उपकरणों और आरोपियों के संभावित अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपियों के पीछे साइबर अपराधियों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
छापेमारी दल में शामिल रहे पुलिस पदाधिकारी
कार्रवाई में पुलिस निरीक्षक संतोष कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक अनिल कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक सत्यवान कुंभकार सहित सशस्त्र बल के जवान शामिल रहे।
पुलिस की इस कार्रवाई से मामले में आगे और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस पूरे साइबर नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस ने लोगों को किया सतर्क
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि फोन या वीडियो कॉल पर कोई व्यक्ति खुद को सीबीआई, पुलिस, ईडी अथवा किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, मुकदमे या डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाए तो घबराएं नहीं। किसी भी सरकारी एजेंसी की ओर से इस तरह वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर रकम जमा कराने की प्रक्रिया नहीं होती।
पुलिस ने लोगों से कहा है कि ऐसे मामलों में तत्काल कॉल काटें, किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें और संबंधित पुलिस थाना अथवा साइबर अपराध हेल्पलाइन से संपर्क करें। थोड़ी सी सतर्कता से करोड़ों रुपये की ठगी से बचा जा सकता है।
