Skip to main content

Birsa Times

श्रीनगर में मुंबई के नागरिक की जमीन खरीद पर सियासी बवाल, डोमिसाइल कानूनों पर उठे सवाल

श्रीनगर में मुंबई के नागरिक की जमीन खरीद पर सियासी बवाल, डोमिसाइल कानूनों पर उठे सवाल

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने के बाद बने नए अधिवास कानूनों को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। मुंबई के एक नागरिक द्वारा श्रीनगर के बाहरी इलाके में जमीन खरीदने और वहां निर्माण शुरू करने के मामले ने विपक्षी दलों को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर सवाल उठाने का मौका दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि गैर-मूल निवासी को जमीन खरीदने की इजाजत देकर सरकार ने डोमिसाइल कानूनों का उल्लंघन किया है।

क्या है पूरा मामला?

अधिकारियों के अनुसार, मुंबई के रहने वाले हरीश जी चावला ने श्रीनगर के बाहरी इलाके हारवन के सैयदपोरा बाला में स्थानीय लोगों से जमीन खरीदी है। उन्होंने फरवरी 2025 में स्थानीय पंचायत से रिहायशी मकानों या झोपड़ियों के निर्माण के लिए अनुमति मांगी थी, जिसे खंड विकास अधिकारी (BDO) ने मई 2025 में मंजूरी दे दी थी। मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी के मुताबिक, चावला ने सैयदपोरा, हारवन में 15 स्थानीय लोगों से 15 कनाल जमीन खरीदी है।

विपक्ष का आरोप और सवाल

यह विवाद पिछले हफ्ते तब शुरू हुआ जब पूर्व मंत्री और ‘अपनी पार्टी’ के अध्यक्ष अल्ताद बुखारी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से सवाल किया कि मुंबई के रहने वाले चावला को सैयदपोरा में होटल के लिए जमीन खरीदने और दिल्ली की एक कंपनी को चत्तरहामा हजरतबल में 150 कनाल जमीन हासिल करने की अनुमति किसने दी, जबकि जम्मू-कश्मीर के मौजूदा निवास कानूनों के तहत ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं है।

बुखारी ने आगे पूछा, “एक गैर-मूल निवासी को यह जमीन खरीदने की इजाजत किसने दी? इस डील को कराने में किसने मदद की? राजस्व अभिलेखों को किसने तैयार और मंजूर किया? और, इस लेनदेन को किसने अधिकृत किया?” उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सीधे मुख्यमंत्री के नियंत्रण में है और अगर यह खरीद मौजूदा डोमिसाइल और भूमि कानूनों का उल्लंघन करके की गई है, तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

सरकार का पक्ष

बुखारी के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने कहा कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा, “कोर्ट यह तय करेगा कि यह (जमीन की खरीद) वैध है या अवैध। चावला ने गैर-कानूनी निर्माण शुरू कर दिया था, लेकिन झील संरक्षण और प्रबंधन जलमार्ग प्राधिकरण ने काम पर रोक लगा दी है; सरकार अदालत में इस केस को लड़ रही है क्योंकि यह अवैध निर्माण है।”

वानी ने दावा किया कि कॉन्ट्रैक्टर ‘अपनी पार्टी’ से जुड़ा हुआ है। हालांकि, अपनी पार्टी ने कॉन्ट्रैक्टर के पार्टी से जुड़े होने के दावे का खंडन किया और आरोप लगाया कि कॉन्ट्रैक्टर सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा हुआ है। बुखारी ने कहा कि सरकार उनके मूल निवास के सवाल का जवाब देने के बजाय इस मुद्दे का राजनीतिकरण करके इसे दबाने की कोशिश कर रही है।

डोमिसाइल कानून क्या कहते हैं?

अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में लागू किए गए नए अधिवास नियम 2020 के अनुसार, अगर कोई बाहरी व्यक्ति केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में 15 साल की अवधि के लिए रहा हो, या सात साल की अवधि के लिए अध्ययन किया हो और जम्मू-कश्मीर में स्थित किसी शैक्षणिक संस्थान में कक्षा 10वीं या 12वीं की परीक्षा में शामिल हुआ हो, तो वह डोमिसाइल हासिल करने का पात्र बन जाता है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार के अधिकारी, अखिल भारतीय सेवा अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) और केंद्र सरकार के स्वायत्त निकाय के अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के अधिकारी, संविधिक निकायों के अधिकारी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और केंद्र सरकार के मान्यता प्राप्त अनुसंधान संस्थानों के अधिकारियों के बच्चे भी डोमिसाइल के पात्र हैं, बशर्ते उन्होंने कुल 10 साल की अवधि के लिए जम्मू-कश्मीर में सेवा की हो। साथ ही, जम्मू-कश्मीर के ऐसे निवासी का बच्चा जो अपने बिजनेस या दूसरे प्रोफेशनल कारणों से केंद्र शासित प्रदेश के बाहर रहता है, लेकिन जिसके माता-पिता 15 साल से जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं, वह भी डोमिसाइल का पात्र है।

कानून में बदलाव और जमीन खरीद

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2020 में एक राजपत्र अधिसूचना के जरिये जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम की धारा 17 से “राज्य के स्थायी निवासी” वाक्यांश को हटा दिया था, जिससे बाहरी लोगों के लिए बिना मूल निवासी प्रमाणपत्र के भी जम्मू-कश्मीर में गैर-कृषि भूमि खरीदने का रास्ता साफ हो गया। पिछले साल विधानसभा में जम्मू-कश्मीर सरकार ने खुलासा किया था कि 631 गैर-निवासियों ने 386 कनाल जमीन खरीदी है। इनमें से 378 गैर-निवासियों ने जम्मू क्षेत्र में 212 कनाल से अधिक जमीन खरीदी, जबकि 253 लोगों ने कश्मीर में 173 कनाल से अधिक जमीन खरीदी।

राजनीतिक गर्माहट

यह मामला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में गर्माहट पैदा कर रहा है। विपक्षी दल इसे डोमिसाइल कानूनों के उल्लंघन और बाहरी लोगों को जमीन बेचने के मामले के रूप में उठा रहे हैं, जबकि सरकार इसे अदालत का मामला बताकर पल्ला झाड़ रही है। मुख्यमंत्री के सलाहकार का यह बयान कि सरकार अदालत में केस लड़ रही है, यह स्पष्ट करता है कि यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में चला गया है। हालांकि, सियासी सवाल यह है कि जब कानून में बदलाव के बाद बाहरी लोगों को जमीन खरीदने का अधिकार मिल गया है, तो फिर इस मामले को लेकर इतना विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है। इसका जवाब शायद आने वाले समय में अदालत की सुनवाई और राजनीतिक बयानबाजी से मिलेगा।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *