रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) में बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र की मौत के बाद छात्रों का गुस्सा भड़क उठा है। बिहार के पूर्णिया निवासी आदित्य कुमार की मौत के बाद विद्यार्थियों ने संस्थान प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्र आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लिया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के अनुसार, छात्र को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने के आरोपों, प्रशासनिक लापरवाही और मौत की परिस्थितियों की जांच की जाएगी।
एंबुलेंस और ऑक्सीजन की व्यवस्था पर उठे सवाल
छात्रों का आरोप है कि घटना के बाद समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली। विद्यार्थियों के मुताबिक, एंबुलेंस की चाबी उपलब्ध कराने में देरी हुई और एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था भी नहीं थी। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि आपात स्थिति के दौरान संबंधित कर्मचारियों और चिकित्सा कर्मियों की भूमिका संतोषजनक नहीं रही।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे की मांग
छात्रों ने संस्थान की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि परिसर में आपातकालीन चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस और अन्य बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त होनी चाहिए।
छात्रों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और हॉस्टल की व्यवस्था में सुधार करने की मांग भी उठाई है।
NHRC ने लिया संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच की बात कही है। आयोग चिकित्सा सहायता में कथित देरी, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल करेगा। इस संबंध में शिक्षा मंत्रालय और संबंधित जांच एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस कर रही मामले की जांच
खेलगांव थाना पुलिस के अनुसार, मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। छात्र के परिवार को घटना की सूचना दे दी गई है। मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही निकाला जा सकेगा।
फिलहाल, छात्रों का विरोध प्रदर्शन संस्थान में आपातकालीन सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
