-जेटीपीएल,पीएनएम,ओसेल,नकाश और गोदावरी जैसे कोल ढुलाई में लगे हाइवा वाहनों की आतंक, सरचढ़ कर बरपाया जा रहा कहर
-लकराही मोड़ पर हाइवा की चपेट में आए दंपती,करवाई की माँग
-इन कोल ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों के लाइजनरों ने मैनेजिंग के नाम पर डकार रहे मोटी रक़म, चलाते हैं सिंडिकेट,भय का माहौल
-कोल कंपनियों के विरोध लिखित शिकायत तथा सड़क जाम करने के लिए पीड़ित परिवार मजबूर,उचित इलाज हेतु मुआवजा की माँग
दिव्य दिनकर:संवाददाता
टंडवा: चतरा। टंडवा थाना क्षेत्र में कोयला ढुलाई के नाम पर सड़कों पर दौड़ रहे भारी वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आम्रपाली, सीबी और केडी माइंस से कोयला ढुलाई में लगे पीएनएम, ओसेल,नकाश,गोदावरी, जेटीपीएल समेत अन्य ट्रांसपोर्टरों के हाइवा वाहनों की तेज रफ्तार और सड़क की बदहाल स्थिति लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती दिख रही है। आए दिन हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद कोल कंपनी और संबंधित एजेंसियों की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
4 अक्टूबर की रात फिर हुआ हादसा, बाल-बाल बची दंपती की जान
इसी कड़ी में 4 अक्टूबर की रात करीब नौ बजे आम्रपाली परियोजना क्षेत्र के उडसू स्थित लकराही मोड़ के समीप कोल हाइवा की चपेट में आने से पति-पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया कि सिमरिया प्रखंड के सलगी गांव निवासी रामकुमार शर्मा, पिता स्व. जितन शर्मा, अपनी पत्नी कमला देवी के साथ सलगी से अपने ससुराल बेलतु जा रहे थे। इसी दौरान लकराही मोड़ के समीप हादसा हो गया।
दुर्घटना में घायल दोनों को बेहतर इलाज के लिए टंडवा स्वास्थ केंद्र से रेफर करते हुए रांची के हेल्थ पॉइंट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों का इलाज चल रहा है। परिजनों के अनुसार, दंपती की हालत गंभीर है और दोनों जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं।
बिंगलात से उडसू मोड़ तक सड़क बनी हादसों का अड्डा
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिंगलात से उडसू मोड़ तक सड़क की हालत बेहद जर्जर है। इसी मार्ग पर दिन-रात भारी कोल हाइवा वाहनों का परिचालन होता है। सड़क की खराब स्थिति, धूल-गर्द और भारी वाहनों की आवाजाही के बीच आम लोगों के लिए इस रास्ते से गुजरना लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कोल परियोजनाओं से प्रतिदिन बड़े पैमाने पर कोयले की ढुलाई तो कराई जा रही है, लेकिन सड़क सुरक्षा और आम राहगीरों की जान की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार कंपनियां गंभीर नजर नहीं आतीं। सवाल यह है कि जब इस मार्ग पर लगातार भारी वाहनों का परिचालन हो रहा है तो सड़क की मरम्मत, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियंत्रण की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
कोयला कंपनियां मुनाफा कमा रहीं, कीमत आम लोग चुका रहे
ग्रामीणों का कहना है कि कोयला ढुलाई से कंपनियों और ट्रांसपोर्टरों को फायदा हो रहा है, लेकिन इसकी कीमत स्थानीय ग्रामीणों को दुर्घटनाओं, धूल, प्रदूषण और जर्जर सड़कों के रूप में चुकानी पड़ रही है। बार-बार हादसों के बावजूद यदि जिम्मेदार एजेंसियां नहीं जागती हैं तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने प्रशासन और कोल कंपनी के अधिकारियों से लकराही मोड़ समेत पूरे बिंगलात-उडसू मार्ग की तत्काल मरम्मत, हाइवा की गति पर नियंत्रण, निर्धारित रूट पर ही कोयला ढुलाई और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही हादसे की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की भी मांग उठ रही है।
