-महादलित परिवारों के सामने फिर खुले में शौच की मजबूरी
-ग्रामीणों ने आईसीडीएस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
-सामुदायिक शौचालय तोड़े जाने की बीडीओ को भी नहीं दी गई जानकारी
रंजीत कुमार विद्यार्थी
मुंगेर: एक ओर सरकार स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) एवं लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत गांवों को स्वच्छ और सुंदर बनाने तथा खुले में शौच की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं दूसरी ओर धरातल पर विभागीय कार्यप्रणाली के कारण सरकारी योजनाओं के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। ताजा मामला धरहरा प्रखंड के सारोबाग पंचायत स्थित महादलित टोला खिरोधरपुर का है, जहां महादलित परिवारों की सुविधा के लिए बनाए गए सामुदायिक शौचालय को तोड़कर उसी स्थल पर आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराए जाने की बात सामने आई है। बताया जाता है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) एवं लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत विशेष रूप से महादलित एवं वंचित बस्तियों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। जिन महादलित परिवारों के घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है, उन्हें खुले में शौच के लिए नहीं जाना पड़े। लेकिन अब सामुदायिक शौचालय को तोड़े जाने के बाद संबंधित परिवारों के सामने एक बार फिर खुले में शौच जाने की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक शौचालय को तोड़कर वहां आईसीडीएस विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि उसी स्थान पर आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण आवश्यक था तो पहले से निर्मित सामुदायिक शौचालय को हटाने के बजाय इसके लिए दूसरी सरकारी जमीन का चयन किया जा सकता था। उनका कहना है कि एक सरकारी योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई संरचना को दूसरी योजना के लिए तोड़ देना सरकारी राशि के दुरुपयोग के साथ-साथ योजना के मूल उद्देश्य को भी प्रभावित करता है। वहीं सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि सामुदायिक शौचालय तोड़े जाने की जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी तक को नहीं है। यदि ग्रामीणों की यह बात सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किसके निर्देश पर सामुदायिक शौचालय को तोड़ा गया और निर्माण स्थल का चयन किस स्तर से किया गया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक तरफ खुले में शौच से मुक्ति के लिए अभियान चला रही है और दूसरी तरफ पहले से उपलब्ध शौचालय की सुविधा ही समाप्त कर दी जा रही है। इससे सरकारी योजनाओं के बीच समन्वय की कमी भी उजागर होती है।
जांच और कार्रवाई की मांग
चंदन कुमार, सावित्री देवी, कबिता देवी, राकेश कुमार, संतोष कुमार सहित स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सामुदायिक शौचालय को तोड़े जाने के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने तथा आईसीडीएस विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग की है तथा संबंधित दोषी पदाधिकारी एवं कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की भी मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे प्रखंड व जिला स्तर से लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष शिकायत करेंगे। इस बावत प्रखंड विकास पदाधिकारी रश्मि भारती ने कहा कि महादलित परिवार के लिए बना सामुदायिक शौचालय को ध्वस्त कर आंगनबाड़ी केन्द्र बनाया जाना गलत है।

