आदिवासी एक्सप्रेस ललित कुमार पाल
शिकारीपाड़ा/ दुमका। शिकारीपाड़ा प्रखंड के शिकारीपाड़ा दुर्गा मंदिर, सरस्वती मंदिर सहित विभिन्न ग्रामीण इलाकों के मंदिरों में मां विपदतारिणी की पूजा बेहद श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस विशेष अवसर पर सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। मां विपदतारिणी की आराधना को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह था और उन्होंने पूरे विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना की।
इस पावन दिन पर सुबह से ही महिलाओं ने निर्जला उपवास रखा और पवित्र मन से मां विपदतारिणी के दरबार में हाजिरी लगाई। मंदिरों में चारों ओर शंख की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। महिलाओं ने माता रानी को फल, फूल और विशेष भोग अर्पित कर अपने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
पूजा संपन्न होने के बाद मंदिरों में एक बेहद खूबसूरत और पारंपरिक दृश्य देखने को मिला, जहां महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सदा सुहागन रहने की कामना की। इसके साथ ही, इस पूजा की मुख्य परंपरा को निभाते हुए महिलाओं ने दुर्वा घास (दूब घास) से बंधा हुआ पवित्र रक्षा सूत्र मां के चरणों में अर्पित करने के बाद अपने परिवार के सदस्यों की कलाई पर बांधा। इस धागे को बांधकर उन्होंने अपने बच्चों और परिजनों की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और हर प्रकार के संकट से रक्षा की प्रार्थना की। पूरे क्षेत्र में मां विपदतारिणी की पूजा को लेकर दिनभर भक्ति का माहौल बना रहा।
शिकारीपाड़ा में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई मां विपदतारिणी की पूजा, सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने रखा उपवास
