आदिवासी एक्सप्रेस संवाददाता
छतरपुर,पलामू। पलामू जिले के छतरपुर अनुमंडल में जमीन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में खुद एक अधिवक्ता-सह-नोटरी पब्लिक ठगी के शिकार हुए हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित अधिवक्ता ने अपने आवेदन में बताया है कि वर्ष 2014 से ही कुछ लोगों द्वारा साजिशन उन्हें जमीन दिलाने का झांसा दिया जा रहा था। पहले भरोसा दिलाया गया, जमीन दिखाई गई और फिर धीरे-धीरे अलग-अलग बहानों से रुपये की मांग शुरू कर दी गई। आरोप है कि इस दौरान 3.5 लाख रुपये प्रति डिसमिल की दर से जमीन तय कराई गई और बार-बार दबाव बनाकर किस्तों में कुल लगभग 5 लाख रुपये वसूले गए।
धोखे का जाल: बार-बार बदले रेट, बढ़ता गया भुगतान
आवेदन के मुताबिक, शुरुआत में जमीन की कीमत कम बताई गई, लेकिन बाद में लगातार रेट बढ़ाकर पैसे की मांग की जाती रही। कभी 3.5 लाख, तो कभी 4 लाख प्रति डिसमिल की बात कहकर पीड़ित को उलझाया गया। इस दौरान कई बार अलग-अलग लोगों के सामने बैठाकर सौदे की पुष्टि कराई गई, जिससे पीड़ित को भरोसा हो गया कि जमीन मिल जाएगी।
बताया गया है कि 22 जुलाई 2024 और 24 जुलाई 2024 को भी आरोपियों ने पीड़ित को बुलाकर तत्काल पैसे देने का दबाव बनाया। 29 जुलाई 2024 को फिर से रकम देने को कहा गया और “पार्टनरशिप डीड” का हवाला देकर पैसा ट्रांसफर कराया गया। इस तरह धीरे-धीरे कुल 5 लाख रुपये तक की ठगी कर ली गई।
जमीन किसी और को बेच दी, विरोध पर धमकी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पैसे लेने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं की गई, बल्कि आरोपियों ने वही जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया और अपने पैसे वापस मांगे, तो उसे धमकाया गया और कहा गया कि “जमीन नहीं मिलेगी, जो करना है कर लो।”
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उसे गवाही देने और मामला दबाने के लिए मानसिक दबाव बनाया। साथ ही यह भी कहा गया कि पैसे का हिसाब दूसरे व्यक्ति के पास है, जिससे जिम्मेदारी टालने की कोशिश की गई।
मानसिक-आर्थिक संकट में परिवार
इस पूरे घटनाक्रम से पीड़ित और उसका परिवार गहरे मानसिक तनाव और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। इलाज, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक दबाव के कारण स्थिति और भी खराब हो गई है।
संगठित गिरोह की आशंका
पीड़ित का कहना है कि इस पूरे मामले में कई लोगों की मिलीभगत है और यह एक संगठित तरीके से की गई ठगी प्रतीत होती है। अलग-अलग व्यक्तियों के जरिए पैसे की मांग और दबाव बनाना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह सुनियोजित साजिश थी।
मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार
पीड़ित अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों को गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए तथा ठगी गई पूरी राशि वापस दिलाई जाए।
प्रशासन पर भी सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। इतने लंबे समय तक मामला चलता रहा, लेकिन किसी स्तर पर कार्रवाई नहीं होना चिंता का विषय है।
छतरपुर में जमीन के नाम पर हुई इस ठगी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जमीन खरीद-बिक्री के मामलों में सतर्कता बेहद जरूरी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।
