Birsa Times

चतरा के ब्रह्मणा पंचायत में फर्जी जॉब कार्ड से लाखों की निकासी का आरोप, सिस्टम कटघरे में

चतरा के ब्रह्मणा पंचायत में फर्जी जॉब कार्ड से लाखों की निकासी का आरोप, सिस्टम कटघरे में

7 से 9 साल के बच्चों को कागजों में बनाया 19 से 29 वर्ष का मजदूर, मनरेगा भुगतान पर उठे गंभीर सवाल

आदिवासी एक्सप्रेस / संतोष कुमार दास

चतरा : सदर प्रखंड के ब्रह्मणा पंचायत से मनरेगा मैं मजदूर और मजदूरी के भुगतान को लेकर झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां स्कूली बच्चों की पहचान बदलकर उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में वयस्क मजदूर बना दिया गया और उनके नाम पर जॉब कार्ड जारी कर लाखों रुपये की मजदूरी राशि निकाल ली गई। मामला उजागर होने के बाद पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय तक की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।जानकारी के अनुसार मध्य विद्यालय दुम्बी में पढ़ने वाले कई बच्चों जिनकी वास्तविक उम्र महज 7 से 9 वर्ष बताई जा रही है को मनरेगा रिकॉर्ड में 19 से 29 वर्ष का दर्शाया गया। इसके बाद उनके नाम पर जॉब कार्ड बनाकर लेबर डिमांड जनरेट की गई और विभिन्न योजनाओं में कार्य करने का रिकॉर्ड दिखाते हुए मजदूरी भुगतान भी कर दिया गया। कागज पर काम, खाते में भुगतान
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन योजनाओं में मजदूरी भुगतान दर्शाया गया है, उनमें से कई योजनाओं के धरातल पर अस्तित्व को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। यदि आरोप सही हैं तो यह केवल फर्जी भुगतान का मामला नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं को कागजों पर चलाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का संगठित खेल हो सकता है। सिस्टम की कई परतें संदेह के घेरे में मामले में पंचायत स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक कई जिम्मेदार पदों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जॉब कार्ड निर्माण, लेबर डिमांड, उपस्थिति दर्ज करने और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं बिना कई स्तरों की स्वीकृति और जानकारी के संभव नहीं हैं।आरोप यह भी है कि कुछ कंप्यूटर ऑपरेटर वर्षों से एक ही प्रखंड में कार्यरत हैं और उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि जांच हुई तो कई और फर्जी जॉब कार्ड और भुगतान के मामले सामने आ सकते हैं।
मेठ आईडी से खेला गया खेल
सूत्रों के अनुसार एक कथित बिचौलिया मेठ आईडी का संचालन कर योजनाओं में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करता था। इसी उपस्थिति के आधार पर भुगतान प्रक्रिया पूरी होती थी। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब पिछले तीन माह से मनरेगा कर्मियों की हड़ताल चल रही है, तब भुगतान की प्रक्रिया किसके माध्यम से संचालित हो रही थी।
सबसे बड़ा सवाल बच्चों के खातों से पैसे किसने निकाले?
यदि बच्चों के नाम पर भुगतान हुआ तो बैंक खातों से राशि निकासी किसने की? क्या अभिभावकों की जानकारी थी या किसी और ने इसका लाभ उठाया? यह जांच का सबसे अहम बिंदु माना जा रहा है। क्योंकि मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि बाल अधिकारों और सरकारी दस्तावेजों में कथित जालसाजी से भी जुड़ा है।
सवाल जो जवाब मांग रहे हैं
बच्चों को बालिग दिखाकर जॉब कार्ड किसने बनवाया? आयु और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
लेबर डिमांड किस आईडी से जनरेट हुई? जिन योजनाओं में भुगतान हुआ, वे वास्तव में मौजूद हैं या नहीं?बच्चों के खातों में गई राशि की निकासी किसने की? भुगतान से पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच क्यों नहीं की क्या पंचायत, प्रखंड और तकनीकी स्तर पर मिली-भगत से यह काम हुआ
इस संदर्भ मेंअधिकारियों ने क्या कहा?
रोजगार सेवक जदु नंदन ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। हड़ताल समाप्त होने के बाद शिकायत की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बीपीओ रामकुमार सिंह ने कहा कि मामला गंभीर है। दस्तावेजों की जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।उप विकास आयुक्त अमरेंद्र सिंहा ने स्पष्ट कहा कि यदि बच्चों के नाम पर फर्जी जॉब कार्ड बनाकर भुगतान कराया गया है तो यह अत्यंत गंभीर अपराध है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज करने के साथ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
जांच की कसौटी पर मनरेगा की विश्वसनीयता ब्रह्मणा पंचायत का यह मामला केवल एक पंचायत या कुछ जॉब कार्डों तक सीमित नहीं दिख रहा। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मनरेगा की निगरानी प्रणाली, दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न होगा। अब देखना यह है कि जांच महज कागजों तक सीमित रहती है या फिर जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई की आंच पहुंचती है। जब स्कूल के बच्चे मजदूर बन जाएं, तो सवाल सिर्फ घोटाले का नहीं, पूरे सिस्टम की जवाबदेही का होता है।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *