देवघर /
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के पूर्वी क्षेत्रीय समिति ने डिप्सर को बड़ी राहत दी है। एनसीटीई ने देवसंघ इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज एंड एजुकेशनल रिसर्च के बीएड, डीएलएड और एमएड के मान्यता को पुनर्बहाल कर दिया है। दरअसल मामला प्रकाश में तब आया जब राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के पूर्वी क्षेत्रीय समिति के बीते 7 मई को की गई बैठक का कार्यकृत जारी की गई। जारी किए गए चिट्ठी में जिक्र है कि इससे संबंधित समस्त दस्तावेजों और अपीलात्मक आदेश के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि संस्थान को बीएड कार्यक्रम की मान्यता तथा एमएड कार्यक्रम की मान्यता बहाल कर दी जाए। समिति ने संबंधित एफिलिएटिंग बॉडी को इस फैसले की सूचना देने का भी निर्देश दिया है।
क्या था पूरा मामला?
एनसीटीई के पूर्वी क्षेत्रीय समिति ने 02 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर संस्थान के बीएड, एमएड और डीएलएड कार्यक्रमों की मान्यता वापस ले ली थी। इसके खिलाफ संस्थान ने एनसीटीई मुख्यालय में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के बाद अपीलीय प्राधिकरण ने 26 फरवरी 2026 को आदेश जारी किया। इसमें 2 दिसंबर के आदेश को रद्द कर मामले को पुनः ईआरसी के पास भेजा गया और ताजा विचारण करने का निर्देश दिया गया। अपीलीय आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि संस्थान अपील के साथ जमा किए गए दस्तावेजों को 15 दिनों के अंदर ईआरसी को उपलब्ध कराए। संस्थान ने 09 मार्च 2026 को अपना जवाब जमा किया, जिसकी प्राप्ति ईआरसी कार्यालय में 24 मार्च 2026 को हुई। अंतिम फैसला 07 मई 2026 को आयोजित ईआसी की 396वीं बैठक में समिति ने सभी दस्तावेजों, एनसीटीई अधिनियम 1993, नियमों, विनियमों और अपीलीय आदेश का गहन अध्ययन करने के बाद फैसला लिया कि संस्थान को बीएड कार्यक्रम की मान्यता तथा एमएड कार्यक्रम की मान्यता बहाल कर दी जाए। समिति ने संबंधित एफिलिएटिंग बॉडी को इस फैसले की सूचना देने का भी निर्देश दिया है।
