50 हजार नगद और जेवर ले उड़े अपराधी
गिरिडीह। जिले के जमुआ थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब उन्हें पुलिस का रत्ती भर भी भय नहीं रहा। मंगलवार की रात अपराधियों ने दुस्साहस का परिचय देते हुए जमुआ थाना से मात्र 200 मीटर की दूरी पर लूट पाट की घटना को अंजाम दिया। घटना रात करीब 8:15 बजे की है। चावल विक्रेता जमुआ निवासी 60 वर्षीय बंसी साव (पिता स्व. सुकर साव) अपनी दुकान बंद कर चुके थे। इसी बीच दो युवक ग्राहक बनकर पहुंचे और चावल खरीदने के बहाने दुकान खुलवाई। दुकान खुलते ही अपराधियों ने अपना असली रंग दिखाया और बंसी साव के साथ मारपीट शुरू कर दी। जब पति को बचाने के लिए उनकी पत्नी दौड़ी, तो बेखौफ अपराधियों ने उनके साथ भी बर्बरता की और मारपीट किया। इस दौरान अपराधियों ने दुकान के गल्ले से ₹50,000 नगद लूट लिए। महिला के गले से सोने की चेन छीन ली। वारदात के बाद दुकान के पिछले रास्ते से अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। सूचना मिलते ही जमुआ पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि अपराधियों की शिनाख्त की जा सके। हालांकि, घटना के बाद से स्थानीय व्यवसायियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। जमुआ में चोरी, लूट और छिनतई की बढ़ती वारदातों ने पुलिसिया गश्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य सड़कों पर वारदात: अधिकांश घटनाएं मुख्य चौक-चौराहों और सड़कों पर हो रही हैं, फिर भी पुलिस नदारद रहती है। सायरन का सन्नाटा: पुलिस की गाड़ियों में सायरन का उपयोग नहीं होता। यदि नियमित गश्त और सायरन का खौफ होता, तो अपराधियों के पैर डगमगाते। संसाधन के बाद भी विफलता: झारखंड सरकार ने जमुआ थाने को नए वाहन और संसाधन उपलब्ध कराए हैं, लेकिन धरातल पर इनका असर शून्य नजर आ रहा है। स्थानीय निवासीयो ने कहा कि थाने के नाक के नीचे ऐसी घटना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बदनुमा दाग है। अगर जनता सुरक्षित नहीं है, तो इन संसाधनों का क्या फायदा। अब देखना यह है कि संसाधन और शक्ति होने के बावजूद जमुआ पुलिस इन बेखौफ अपराधियों पर नकेल कस पाती है या अपराध का यह ग्राफ यूं ही बढ़ता रहेगा।
