काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने सरकार गठन के 100 दिन पूरे होने के बाद पहली बार निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक संवाद की शुरुआत की है। सरकार का नेतृत्व संभालने के बाद अब तक प्रधानमंत्री की राजनीतिक दलों, निजी क्षेत्र और कूटनीतिक समुदाय के साथ सीमित बैठकें हुई थीं, लेकिन अब सरकार ने नियमित संवाद और परामर्श की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इसे नेपाल की आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बुधवार को प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय में आयोजित बैठक में नेपाल उद्योग, व्यापार और निवेश जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, निजी क्षेत्र की चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा करना था। इससे पहले प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष मासातो कांडा से भी मुलाकात कर विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। वहीं गुरुवार को निर्माण व्यवसायियों के साथ भी विशेष बैठक निर्धारित की गई है।
इस संवाद का समन्वय सांसद विदुषी राणा ने किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं में सुशासन और आर्थिक समृद्धि सबसे ऊपर हैं। उनके अनुसार सरकार ने पहले 100 दिनों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कई अहम कदम उठाए हैं। कई मामलों में जांच, गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की गई है। अब सरकार का पूरा ध्यान आर्थिक विकास को गति देने पर है, जिसमें निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक शुरुआत में केवल 30 मिनट के लिए तय की गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री की रुचि और विस्तृत चर्चा के कारण यह लगभग दो घंटे तक चली। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने उद्योगपतियों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने केवल शिकायतें सुनने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि व्यवसायियों से व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले समाधान भी सुझाने को कहा।
प्रधानमंत्री शाह ने अपने सचिवालय और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त अनौपचारिक समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है। यह समिति हर महीने कम से कम एक बार बैठक करेगी और निजी क्षेत्र की समस्याओं, उनके समाधान तथा सरकार द्वारा की गई प्रगति की रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री को सौंपेगी। माना जा रहा है कि इससे सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और नीतिगत फैसलों में तेजी आएगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में सरकार केवल उद्योग जगत ही नहीं, बल्कि निर्माण, होटल एवं पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और अन्य प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ भी नियमित संवाद करेगी। गुरुवार को निर्माण व्यवसायियों के साथ प्रस्तावित बैठक में विकास परियोजनाओं में आ रही बाधाओं, निर्माण क्षेत्र की चुनौतियों और आर्थिक सुधार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी।
नेपाल निर्माण व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष निकोलस पांडे ने प्रधानमंत्री से सीधे संवाद का अवसर मिलने पर संतोष जताया। वहीं नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के अध्यक्ष अञ्जन श्रेष्ठ ने बताया कि बैठक में निवेश माहौल, उद्योगों की समस्याओं, अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और सुधार के उपायों पर खुलकर विचार-विमर्श हुआ। उनके अनुसार प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार निजी क्षेत्र को देश की अर्थव्यवस्था की “ड्राइविंग सीट” पर देखना चाहती है और उसकी प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि बजट निर्माण से पहले प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रतिनिधि सभा के सांसदों और सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी विचार-विमर्श किया था। अब निजी क्षेत्र के साथ शुरू हुआ यह संवाद सरकार की व्यापक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार उद्योग जगत के सुझावों को नीतियों में शामिल करती है, तो इससे नेपाल में निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है।
