रिपोर्टर महेन्द्र कुमार गौतम जालौन
जालौन। सरकारें भले ही ग्रामीण क्षेत्रों के कायाकल्प और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने का दावा करती हों, लेकिन जालौन जिले के माधौगढ़ विकास खंड से एक ऐसा मामला सामने आया है जो इन दावों की पोल खोलता है। विकास खंड माधौगढ़ की ग्राम पंचायत कासिमपुर में विकास के नाम पर जनता को सिर्फ ‘ठेंगा’ मिला है। ग्राम प्रधान और ग्राम विकास सचिव की घोर लापरवाही के चलते आज पूरा गांव नारकीय जीवन जीने को मजबूर है।
रास्तों पर जलभराव, गंदगी का लगा अंबार
कासिमपुर गांव में नालियों का निर्माण न होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी मुख्य रास्तों पर बह रहा है। सड़कों पर कीचड़ और गंदे पानी का सैलाब इस कदर फैला है कि ग्रामीणों का पैदल निकलना भी दूभर हो गया है। जगह-जगह लगे गंदगी के ढेरों से उठती बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।
संक्रमण का बढ़ा खतरा
बारिश के मौसम और रास्तों पर जमा गंदे पानी के कारण गांव में संक्रामक बीमारियों (जैसे मलेरिया, डेंगू, और डायरिया) के फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीण हर वक्त किसी बड़ी महामारी की आशंका से भयभीत हैं।
मंदिर जाने वाली महिलाओं को भारी परेशानी
गांव की इस बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। रास्ते में कीचड़ और घुटनों तक भरे गंदे पानी के कारण महिलाओं को मंदिर जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आस्था के केंद्र तक पहुँचने के लिए भी लोगों को इस गंदे और दूषित पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
शौचालय तक को मोहताज बुजुर्ग, योजनाओं में धांधली के आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सचिव पर विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी बंदरबांट की गई है। गांव के वास्तविक पात्र और गरीब परिवारों को आवास योजना से वंचित कर दिया गया है, जबकि मिलीभगत कर अपात्रों को आवासों की रेवड़ी बांटी गई है।
बुजुर्गों को शौचालय नहीं
ओडीएफ’ (खुले में शौच मुक्त) के बड़े-बड़े दावों के बीच गांव के बुजुर्गों तक को शौचालय नसीब नहीं हुआ है। उम्र के इस पड़ाव में भी बुजुर्ग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, जांच की मांग
कासिमपुर गांव के पीड़ित ग्रामीणों ने अब इस बदहाली के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि ग्राम प्रधान और सचिव की जुगलबंदी के कारण गांव का विकास पूरी तरह ठप पड़ा है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि:
तत्काल प्रभाव से कासिमपुर गांव में जलभराव और गंदगी की समस्या का निस्तारण कराया जाए।
आवास और शौचालय आवंटन में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दोषी सचिव और ग्राम प्रधान के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस बदहाल गांव की सुध कब लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
