संवाददाता/जिला व्यूरो/दिव्य दिनकर न्यूज
राँची। एसीबी की कार्यशैली से JASA नाराज है। बूढ़मू के अंचल अधिकारी (CO) सचिदानंद कुमार वर्मा की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई गिरफ्तारी को लेकर झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ (JASA) ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। संघ ने दावा किया है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, और इसे एक राजपत्रित अधिकारी के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने गिरफ्तारी को नियमों के विपरीत0 बताया, उच्चस्तरीय जांच, SOP और तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की घोषणा की है। रविवार को केंद्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में संघ ने कहा कि वह भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई का समर्थन करता है, लेकिन ऐसी कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर जताई आपत्ति
संघ के अनुसार, अंचल अधिकारी को देर रात उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया। JASA का दावा है कि इस कार्रवाई में भ्रष्टाचार निवारण कानून और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के कुछ प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। संघ ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी को कथित रूप से न तो रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया और न ही उनके पास से कोई अवैध राशि बरामद हुई। प्रेस विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया कि गिरफ्तारी मुख्य रूप से सह-आरोपी के कथित बयान के आधार पर की गई, जिसे संघ ने पर्याप्त आधार नहीं माना है।
नामांतरण मामले का भी किया उल्लेख
संघ ने अपने बयान में कहा कि जिस नामांतरण (म्यूटेशन) प्रकरण को कार्रवाई का आधार बताया जा रहा है, उसमें अंचल अधिकारी पहले ही संबंधित आवेदन को विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्वीकार कर चुके थे। JASA का कहना है कि इस तथ्य को भी जांच के दौरान ध्यान में रखा जाना चाहिए। मामले की स्वतंत्र समीक्षा के लिए झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ ने तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने की घोषणा की है। संघ के अनुसार, यह समिति पूरे घटनाक्रम का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट संगठन को सौंपेगी।
सरकार से क्या मांग की?
संघ ने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, यदि0 कहीं प्रक्रिया संबंधी चूक हुई हो तो उसकी जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की मांग की है।साथ ही JASA ने कहा है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और संबंधित अधिकारी को न्याय नहीं मिला, तो संगठन राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा।
