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मिलावटखोरों पर प्रशासन की सख्ती, 10.22 लाख का जुर्माना

मिलावटखोरों पर प्रशासन की सख्ती, 10.22 लाख का जुर्माना

-जिलाधिकारी ने खाद्य एवं औषधि विभाग को दिए कड़े निर्देश, रंगयुक्त सब्जियों, दूध, मसालों और खाद्य तेल की नियमित सैंपलिंग के आदेश
जनपद में आमजन को सुरक्षित एवं शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के विरुद्ध चल रही कार्रवाई की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के प्रति किसी भी स्तर पर नरमी न बरती जाए तथा मिलावटखोरों के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रखा जाए।
बैठक में सहायक आयुक्त (खाद्य) डॉ. सी.आर. प्रजापति ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार चलाए गए विशेष अभियान के तहत जनपद में मिलावटखोरों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई है। न्यायालय द्वारा अब तक कुल 10 लाख 22 हजार 500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया जा चुका है। दूध में मिलावट के दोषी पाए गए 09 व्यक्तियों पर अकेले 5 लाख 72 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष में 52 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, जिनमें 15 नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। इन सभी मामलों में न्यायालय में वाद दायर किए गए तथा दोषी विक्रेताओं पर अर्थदंड लगाया गया।
औषधि निरीक्षक ने बताया कि वर्ष के दौरान 37 मेडिकल प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 26 औषधियों के नमूने लिए गए, जिनमें एक नमूना अधोमानक पाया गया। संबंधित प्रकरण में न्यायालय में वाद दायर कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद के सभी मेडिकल स्टोरों को जीएसटी पंजीकरण के दायरे में लाकर पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गर्मी के मौसम को देखते हुए जूस, शीतल पेय एवं अन्य पेय पदार्थों की गुणवत्ता की विशेष निगरानी रखने तथा खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायनों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि बाजार में बिक रहे दूध, फल, रंगयुक्त परवल एवं भिंडी, मसाले, खाद्य तेल तथा अन्य खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग कराई जाए। थोक एवं फुटकर विक्रेताओं पर लगातार निगरानी रखी जाए ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। जिलाधिकारी ने न्यायालयों में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी कर त्वरित निस्तारण तथा अधिरोपित जुर्मानों की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचन्द मौर्य, सहायक आयुक्त (खाद्य) डॉ. सी.आर. प्रजापति, औषधि निरीक्षक, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, व्यापार मंडल के प्रतिनिधि एवं स्वयंसेवी संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।

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