NH-114A पर तीन दर्जन से अधिक बम्पर्स पर न जेब्रा क्रॉसिंग है और न ही रिफ्लेक्टर, रात के अंधेरे में अनियंत्रित होकर पलट रहे वाहन।
शिकारीपाड़ा /दुमका
आदिवासी एक्सप्रेस।
दुमका–रामपुरहाट सड़क (NH-114A) पर वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए स्पीड ब्रेकर अब वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत और जानलेवा दुर्घटनाओं का सबब बनते जा रहे हैं। इन स्पीड ब्रेकरों पर सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई है, जिससे इस मार्ग पर आए दिन गंभीर हादसे हो रहे हैं। यह चिंता हैप्पी क्लब शिकारीपाड़ा के अध्यक्ष विकास भगत ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर व्यक्त की है।
विकास भगत ने बताया कि भारी और अन्य वाहनों की रफ्तार पर लगाम कसने के लिए इस मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर लगभग तीन दर्जन से अधिक स्पीड ब्रेकर (बम्पर) बनाए गए हैं। विडंबना यह है कि इनमें से अधिकांश स्पीड ब्रेकरों पर नियमानुसार न तो सफेद रंग की जेब्रा क्रॉसिंग बनाई गई है और न ही उन पर रिफ्लेक्टर या रेडियम की पट्टियाँ लगाई गई हैं।
विशेषकर रात्रि के समय तथा खराब मौसम या कोहरे में वाहन चालकों को ये स्पीड ब्रेकर दूर से दिखाई नहीं देते हैं। इसके कारण चालक समय रहते अपने वाहन की गति कम नहीं कर पाते, जिससे तेज रफ्तार गाड़ियों का संतुलन अचानक बिगड़ जाता है और वे दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं। कई स्थानों पर लगातार हो रहे हादसों के कारण स्थानीय लोगों और राहगीरों में भी भय का माहौल है।
सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए विकास भगत ने कहा कि प्रत्येक स्पीड ब्रेकर पर सफेद जेब्रा मार्किंग, रिफ्लेक्टर एवं रेडियम पट्टियाँ लगाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वाहन चालकों को दूर से ही बम्पर होने का आभास हो सके। इसके अतिरिक्त, स्पीड ब्रेकर आने से कुछ दूरी पहले सड़क किनारे चेतावनी संकेतक बोर्ड तथा प्रतीकात्मक सुरक्षा संकेत भी लगाए जाने चाहिए, जिससे वाहन चालक पहले से ही सतर्क होकर गाड़ी की गति धीमी कर लें।
हैप्पी क्लब ने इस गंभीर समस्या को लेकर झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल (देवघर), आयुक्त (संथाल परगना प्रमंडल, दुमका) तथा उपायुक्त (दुमका) से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि दुमका–रामपुरहाट सड़क पर स्थित सभी स्पीड ब्रेकरों का अविलंब सर्वेक्षण कराया जाए और आवश्यक सुरक्षा मानकों के अनुरूप जेब्रा क्रॉसिंग, रिफ्लेक्टर, रेडियम एवं चेतावनी बोर्ड स्थापित किए जाएं। यदि समय रहते ये कदम उठाए जाते हैं, तो सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और आम नागरिकों की जान सुरक्षित की जा सकती है।
