लोटस सूत्रा फाऊंडेशन स्थापना दिवस अंतराष्ट्रीय महिला दिवस को समर्पित

विशेष संवाददाता द्वारा
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्यों में लोटस सूत्रा फाऊंडेशन संसार की सारी महिलाओं को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देती है। लोटस सूत्रा फाऊंडेशन हमेशा से ये मंच महिलाओं को प्रदान करने में विश्वास रखती है। इस फाउंडेशन की संस्थापना भी इस बात को ध्यान में रखते हुए बनायी गयी थी कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा भागीदारी मिले और कुछ हद तक हमे इस संदर्भ में एक वर्ष के दौरान कामयाबी भी मिली है।हजारीबाग, झारखंड निवासी इरिषा आनन्द जो खुद एक महिला है अपने कार्याकाल एक वर्ष पूरी कर चुकी है। उन्होंने बताया लोटस सूत्रा फाऊंडेशन की स्थापना १२जनवरी २०२१ को हुई थी। इन में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है पूरे एक वर्ष में । फाउंडेशन की संस्थापक होने के नाते उन्होंने बड़ी ही लग्न और निरंतर प्रयास से अपने कर्तव्यों का पालन किया है।एक एक कार्यक्रम की प्रस्तुति में योगदान सराहनीय रही है। इस संस्था की प्रेसिडेंट डा कामिनी कुमारी दास जो गिरीडीह, झारखंड निवासी हैं और मिराडा हाऊस में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं अपना योगदान दिया है।इस संस्था ने पहली बार कोरोना काल में २६जनवरी को “गणतंत्र दिवस समारोह” का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम की संचालक डा० कामिनी कुमारी दास रही थीं। कार्यक्रम में अतिथियों में हमारे वक्ता डा० प्रणव ठाकुर सर ने संविधान के ऊपर अपनी विचार रखे थे। सितार वादक संगीता गुप्ता जी, जो दिल्ली विश्वविद्यालय, म्यूजिक विभाग में शोधकर्ता हैं, अपनी प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया था। आदया कालरा मिरांडा हाउस की पूर्व छात्रा ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया था। एडवोकेट पटना हाईकोर्ट, संजय पांडे सर मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। लोटस सूत्रा फाऊंडेशन की दूसरी प्रस्तुति “फगवा लिटरेचर फेस्टिवल” २३ मार्च २०२१ को हुई, जिसे कलमशाला जो साहित्य की दुनिया का जाना-माना हिस्सा है से भरपूर सहयोग मिला। कलमशाला के संस्थापक, रवि मिश्रा का योगदान सराहनीय रहा।उन्होंने अपनी ओर से न केवल कवयित्री के तौर पर श्रृष्टि मिश्रा जी को मंच प्रदान किया बल्कि ख़ुद भी हमारे उत्सव में शामिल होकर प्रोत्साहन दिया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रोफेसर सरीना कालिया मैम, जो राजस्थान विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं, अपनी प्रस्तुति से फागुन मास की विशेषताओं से परिचित कराया। इस फेस्टिवल की असली हकदार तो हमारी चम्पा कुमारी रहीं हैं जो एक लोक गीत गायिका हैं, अपनी मधुर आवाज़ से पूरे उत्सव में भाग लेने वालों का मन मोह लिया था। अंततः शिवजीत सर ने फागुन की विशेषता साहित्य में किस तरह से महत्त्वपूर्ण है का विश्लेषण करते हुए फगवा लिटरेचर फेस्टिवल को सफल बनाने में भरपूर योगदान दिया है। लोटस सूत्रा फाउंडेशन सिर्फ़ एक मंच ही नहीं है बल्कि एक ऐसी धरोहर है, जिसने साहित्य-संस्कृति-संगीत को धागों में पिरोकर रखा है। २०२१ का ही एक और महत्त्वपूर्ण उत्सव “छठ लिटरेचर फेस्टिवल” रहा है, जिसमें इस संस्था ने इस उत्सव का आयोजन हिन्दीनामा अंकुश कुमार, जो साहित्य की दुनिया की जानी- मानी हस्ती और संस्थापक हैं, उनके साथ मिलकर संयुक्त कार्यक्रम किया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, असिस्टेंट प्रोफेसर सुरभी सिन्हा जो मिरांडा हाउस में बतौर कार्यरत हैं ने अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने दर्शकों को छठ माता और उन से जुड़े इतिहास, संस्कृति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि छठ पर्व की महिमा क्या है । इस उत्सव में कवयित्री अंकिता दुबे जी ने बहुत ही सुन्दर कविता भोजपुरी में प्रस्तुत की । अंततः डा० कामिनी कुमारी दास, मेबलम और इस फाउंडेशन की संस्थापक ईऋषा आनन्द ने छठ माता का गीत प्रस्तुत किया, जिसने इस उत्सव में जान डाल दी। लोटस सूत्रा फाउंडेशन हर पर्व, हर त्यौहार में अपने परिवार जनों को संदेश भी देता रहा है।
नये साल के पड़ाव में २०२२ को और बड़े हर्ष और उल्लास से मनाते हुए लोटस सूत्रा फाउंडेशन ने साल की शुरुआत “जश्न-ए-नज़्म उत्सव” मनाकर संयुक्त तौर पर “साहित्य की दुनिया” के साथ की, इस कार्यक्रम में डा० कामिनी कुमारी दास ने मुख्य वक्ता की हैसियत से गीतकार जावेद अख़्तर, संतोष आनंद और गुलज़ार साहब के लिखे गीतों और उनसे जुड़े इतिहास के बारे में जानकारी दी। इस उत्सव को सफल बनाने में कवयित्री रंजना लता जी का भी योगदान रहा। टीना पुरोहित, जो मिरांडा हाउस की छात्रा हैं ने अपनी कविता से लोगों का मन जीत लिया। इस उत्सव की असली हकदार तो तान्या हैं, जिन्होंने बतौर गायिका ‘आज जाने की ज़िद ना करो’ गाना गाकर जश्न को और भी खूबसूरत बना दिया था। इस संस्था की संस्थापिका सुश्री ईऋषा आनन्द एवं डा० कामिनी कुमारी दास भाग लेने वाले एक-एक अतिथिगणों का आभार व्यक्त करती हैं। उनमें शामिल हैं, प्रोफेसर मनमोहनी कौल मैम, डा० इंदिरा प्रसाद मैम मिरांडा हाउस, डा० तारा मल्हार, डा० कर्मवीर सिंह, डा० आरती कुमारी मैम,डा० अनुपम कुमार,वर्षा मिरांडा हाउस, ललिता, रंजना लताजी,डा शैलजा गोयल मैम, प्रभंजनी, नवदीप,सोनाली मैम, कोमल, इत्यादि।

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