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प्रमोद के दोस्त ने ही चार अन्य दोस्तो संग मिलकर किया था हत्या।

प्रमोद के दोस्त ने ही चार अन्य दोस्तो संग मिलकर किया था हत्या।

विकाश कुमार

राजपुर थाना क्षेत्र के गाड़िया निवासी प्रमोद कुमार यादव का हुए ब्लाइंड मर्डर केस में चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अपराध और रंगदारी की योर आकर्षण बना जी का जंजाल। हुए खुलासे से पता चला है की प्रमोद के हत्या में शामिल उनके ही पांच दोस्त है जो डॉन बनने की चाहत रखते है, यही कारण है की कम समय में चर्चित होने और अधिक पैसा कमाने की चाहत में कुल छः दोस्तो द्वारा बिहार से अवैध हथियार खरीदने के लिए 40 हजार रुपए इक्कठा करके प्रमोद कुमार यादव को दिया गया था, परंतु प्रमोद उन पैसों का हथियार नहीं खरीदकर खुद के लिए आई फोन ले लिया जो विवाद का मूल कारण बना। जब इसकी जानकारी उनके पांच दोस्तो को लगी तो वे सभी प्रमोद का विरोध करना शुरू कर दिया। जब प्रमोद हथियार और पैसा दोनो नही लौटाया तब उसके पांचों दोस्तो ने मिलकर प्रमोद की हत्या की कहानी रची तथा प्लान के तहत बीते शुक्रवार के रात करीब 08:30 बजे प्रमोद के पांच दोस्तो ने फोन करके गाड़िया पूल के पास मिलने के लिए बुलाया जिसके बाद पूर्व में हुए हथियार खरीद बिक्री को लेकर विवाद पर प्रमोद के साथ विवाद होना शुरू हो गया जिसके बाद पूर्व प्लान के तहत पीछे से उसके एक दोस्त के द्वारा प्रमोद के गले में राशि डाल कर उसका गला घोंटा गया और मुंह में कपड़ा डालकर उसका हाथ और पैर बांध कर गाड़िया पूल के 200 मीटर दूर ले जाकर प्रमोद के मृत्यु के उपरांत साक्ष्य और घटना को छुपाने के लिए प्रमोद के शव को गाड़िया नदी में दो फिट नीचे गाड़ दिया गया। वही इस पूरे घटना क्रम में दर्ज कांड संख्या 37/26 के तहत एक नाबालिक को निरुद्ध करते हुए कुल तीन लोगो का गिरफ्तारी की गई है। गिरफ्तार आरोपियों में 1 सुनील कुमार पिता बैजनाथ सिंह उम्र 19 वर्ष 2, सुनील कुमार पिता विकास सिंह भोक्ता उम्र 21 वर्ष दोनो साकिन पथेल और एक नाबालिक को भी निरुद्ध किया गया है। वही आरोपियों के पास से हत्या में प्रयुक्त 1 गमछा, एक रस्सी का टुकड़ा, हत्या का कारण बने (7) अदद जिंदा राउंड, मृतक का आई फोन, तीन अन्य मोबाइल। वही इस घटना के छापामारी दल में 1, सन्नी वर्धन एसडीपीओ 2, विपिन कुमार पुलिस निरक्षक। 3, रूपेश कुमार थाना प्रभारी राजपुर। 4, अमित कुमार गुप्ता, राजपुर थाना। 5, संदीप कुमार वर्मा राजपुर थाना। 6 राजपुर थाना सशस्त्र बल के जवान शामिल है। वही इस पूरा घटना ने चतरा को चौंका दिया है, जिस उम्र में इन बच्चो को अपनी भविष्य बनाने की अग्रसर होना चाहिए उस उम्र में अपराध के क्षेत्र में कूदना क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। पुलिस प्रशासन के काफी मेहनत और सघन अभियान से जहां इस क्षेत्र से अफीम का कलंक अब मिटते दिख रहा था वही इन बच्चो का गिरोह बनाने और अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने की प्लानिंग ने पुलिस को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे मामलो को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

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