आलोक कौशिक, किशनगंज संसदीय क्षेत्र में राजद इस चुनाव के बहाने अपने खोये हुए अस्तित्व की वापसी के लिये बेहाल दिख रही है और इस बाबत राजद सुप्रीमो की चाहत है कि अररिया के जोकीहाट क्षेत्र के राजद विधायक शाहनवाज आलम अबकी किशनगंज सीट पर लड़ाए जायें। शाहनवाज के बड़े भाई सरफ़राज़ आलम अभी अररिया से राजद के सांसद हैं जो पिछले साल सांसद पिता स्व. तस्लीमुद्दीन की मृत्यु के बाद हुए उप चुनाव में राजद की टिकट पर अररिया से सांसद निर्वाचित हुए थे। उस दौरान ही सरफ़राज़ ने जोकीहाट के जदयू विधायक पद से इस्तीफा देकर राजद का दामन थामा था तो जोकीहाट सीट खाली हो गयी थी। तब लालू प्रसाद यादव ने स्व. तस्लीमुद्दीन के ही छोटे पुत्र शाहनवाज को बुलाकर जोकीहाट सीट से विधानसभा उप चुनाव के लिए राजद का टिकट थमा दिया था तो लालू प्रसाद यादव की चाहत पर पानी न फिरा और शाहनवाज चुनाव में बाजी मार कर विधायक निर्वाचित हुए। शायद यही कारण है कि राजद ने किशनगंज सीट हथियाने का फार्मूला अपनाते हुए फिर से तस्लीमुद्दीन फैमिली पर ही दाव चलने की रणनीति अपनाने का फैसला किया है।सीमांचल की चुनावी राजनीति को लेकर फिलवक्त रह रह कर टिकट प्रत्याशियों के साथ साथ दलों के भी चेहरे अदल बदल रहें हैं। देखना है कि आने वाले फाइनल लिस्ट में किस चेहरे को किस सीट से लड़ाई के मैदान में उतारता जाता है।
शाहनवाज आलम पर गेम खेलने के मूड में राजद
