करोड़ो रुपए खर्च के बाद भी सरकारी कार्यालय में लगी सोलर सिस्टम फेल

करोड़ो रुपए खर्च के बाद भी सरकारी कार्यालय में लगी सोलर सिस्टम फेल

सोलर पैनल लगाने के बाद दुबारा सुध लेने नहीं पहुंचा ठेकेदार

 

विनय संगम, बिरनी। झारखण्ड सरकार ने बिजली के प्रयोग को कम करने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों में सोलर पैनल लगाया गया था ताकि बिजली की समस्या से निजात मिल सके। योजना के अनुसार प्रखण्ड मुख्यालय, थाना परिषर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सभी पंचायत भवनों में सोलर पैनल लगाया गया था। जिसके लिए सरकार ने करोड़ रुपए खर्च किया था ताकि बिजली कट एवं बिल से छुटकारा मिलेगा परन्तु ठकेदार ने इसे सिर्फ लगा कर छुटकारा पा लिया। कर्मचारियों का कहना है कि सोलर लगाने के बाद मुश्किल से एक महीना इससे काम किया गया जिसके बाद खराब हुआ सो अब तक खराब ही है। कई बार इसकी शिकायत किया गया परन्तु अब तक सुधार नहीं हो पाया है। प्रखण्ड के दूर-दराज से अपने काम लेकर पहुंचे जनता को कई बार मायूस हो कर बिना काम किए वापस लौटना पड़ता है। कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर कहते हैं बिजली की स्थिति ऐसी है कि जबतक कम्प्यूटर स्टार्ट होता है तबतक दुबारा बन्द हो जाता है ऐसे में कैसे काम किया जा सकता है। इसके अलावा बिजली नहीं रहने के वजह से प्रखण्ड सभागार में अक्सर बिना पंखे के ही मीटिंग किया जाता है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली चले जाने जे बाद कर्मचारी मोबाइल के लाइट से काम चलाते हैं। प्रखण्ड कार्यालय के अलावा स्वास्थ्य केंद्र, थाना परिषर एवं पंचायत भवनों में भी सोलर बन्द पड़ा है।

 

गिरिडीह को सोलर सिटी बनाने की घोषणा

झारखण्ड सरकार ने गिरिडीह जिला को प्रदेश का पहला सोलर सिटी बनाने की घोषणा किया है। सोलर सिटी योजना के लिए कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है। जानकारी के अनुसार सोलर सिटी योजना के तहत सभी घरों में सोलर रूफ टॉप पावर प्लांट लगेगा। घरों की छतों पर सोलर पैनल की सहायता से एक किलोवाट से लेकर जरूरत के मुताबिक सोलर पैनल लगाए जाएंगे। सोलर पैनल घरों की छतों पर या फिर खाली जमीन पर भी लगाए जाएंगे। इसके लिए घर और जमीन के मालिक को सब्सिडी भी दी जाएगी। बता दे कि गिरिडीह में साल के 300 दिन सूर्य की रौशनी रहती है. इसी वजह से गिरिडीह को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का काम किया जा रहा है।

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