नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति को लेकर तुलना सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित बताए जा रहे एक लेख में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं, भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारियों और दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को लेकर कई दावे किए गए हैं।
लेख में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान भारत को कई देशों से विशेष सम्मान और महत्वपूर्ण समझौते हासिल हुए। वहीं, ट्रंप के संदर्भ में नोबेल शांति पुरस्कार की उनकी इच्छा और विदेश नीति से जुड़े विवादों का जिक्र किया गया है।
मोदी की विदेश यात्राओं और भारत की कूटनीति का जिक्र
लेख में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कई विदेशी यात्राएं कीं और इस दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। हर यात्रा को अलग रणनीतिक और आर्थिक लक्ष्य से जोड़कर देखा गया।
रिपोर्ट में ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया गया है। दावा है कि इस समझौते के तहत बड़ी संख्या में वस्तुओं पर टैरिफ कम या समाप्त किए जाने का रास्ता साफ हुआ।
इसके अलावा यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों और भविष्य में दोनों पक्षों के बीच व्यापार बढ़ने की संभावनाओं का भी जिक्र किया गया है।
फ्रांस समेत कई देशों के साथ मजबूत हुए रिश्ते
लेख में भारत और फ्रांस के बीच AI, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को भी प्रमुखता दी गई है। इसके साथ ही जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ भारत के बढ़ते रक्षा और औद्योगिक सहयोग को भी भारत की बहुस्तरीय विदेश नीति का हिस्सा बताया गया है।
शिप बिल्डिंग के क्षेत्र में भी भारत की नई साझेदारियों का जिक्र किया गया है। वहीं, नॉर्वे के संभावित निवेश और रोजगार से जुड़े दावे तथा न्यूजीलैंड के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग को भी लेख में महत्वपूर्ण बताया गया है।
ट्रंप के दबाव के बीच भारत की रणनीति?
लेख के दूसरे हिस्से में भारत-अमेरिका संबंधों और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के संदर्भ में कई दावे किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि अमेरिका की ओर से टैरिफ और व्यापार से जुड़े दबावों के बावजूद भारत ने दूसरे देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।
लेख में यह भी दावा किया गया है कि भारत ने अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए मल्टीपल पार्टनरशिप की नीति को प्राथमिकता दी। फ्रांस, जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग को इसी रणनीति से जोड़कर देखा गया है।
रूस, चीन और BRICS को लेकर भी चर्चा
रिपोर्ट में भारत के रूस के साथ संबंधों का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अन्य विकल्पों पर भी काम किया।
वहीं, चीन के साथ भारत के रिश्तों के संदर्भ में BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों की भूमिका का जिक्र किया गया है। लेख के अनुसार, भारत ने किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की रणनीति अपनाई है।
मोदी-ट्रंप तुलना ने खींचा ध्यान
कुल मिलाकर, लेख में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति को बहुपक्षीय साझेदारी, व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग के नजरिए से पेश किए जाने का दावा किया गया है, जबकि ट्रंप की नीतियों की तुलना अमेरिकी दबाव, टैरिफ और वैश्विक कूटनीति के संदर्भ में की गई है।
हालांकि, लेख में बताए गए समझौतों, निवेश और व्यापार से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, इसलिए इन्हें यहां लेख में किए गए दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
