
साहिबगंज: झारखंड के साहिबगंज जिले में सड़क के अभाव में एक गर्भवती महिला को खटिया पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। 19 वर्षीय सुकुरमुनी पहाड़िन को रविवार को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन आरोप है कि गांव तक पहुंचने का रास्ता नहीं होने के कारण एंबुलेंस चालक ने आने से मना कर दिया। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने खटिया पर महिला को लिटाया और करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर उसे अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।
यह मामला बोरियो प्रखंड की मोतीपहाड़ी पंचायत के पोड़ैया बेड़ो गांव का है। आदिम पहाड़िया जनजाति बहुल इस गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंची है। सड़क की कमी के कारण ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
खटिया पर लादकर चार किलोमीटर पैदल चले परिजन
सुकुरमुनी पहाड़िन, बुधना पहाड़िया की पत्नी हैं। रविवार को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिवार ने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की। लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी और महिला की परेशानी बढ़ने लगी। इसके बाद परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से खटिया का इंतजाम किया और सुकुरमुनी को उस पर लिटाकर पैदल निकल पड़े।
परिजन करीब चार किलोमीटर चलकर पोड़ैया संताली गांव पहुंचे। वहां से ई-रिक्शा की मदद से गर्भवती महिला को बोरियो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। इस तरह सड़क और परिवहन की सुविधा नहीं होने के कारण परिवार को प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

कई बार गुहार के बाद भी नहीं बनी पक्की सड़क
गांव के ग्राम प्रधान चांदू मालतो के अनुसार, गांव में पक्की सड़क बनवाने के लिए प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान लगातार बारिश होने से गांव की कच्ची पगडंडी कीचड़ से भर जाती है और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क करना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में केवल मरीजों को ही नहीं, बल्कि आम लोगों और स्कूली बच्चों को भी रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है।
बारिश में गांव का संपर्क टूटने से बढ़ती है परेशानी
ग्राम प्रधान के मुताबिक, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने के साथ ही सड़क निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन भी किया गया, लेकिन अब तक गांव में पक्की सड़क नहीं बन पाई है।
सड़क की कमी के कारण आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। सुकुरमुनी पहाड़िन को खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाने की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े किए हैं।
