
समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी: हेमंत सोरेन
-आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर और सिरम टोली स्थित सरना स्थल में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करमटोली स्थित आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर और सिरम टोली स्थित सरना स्थल के सरहुल पूजा समारोह में शामिल हुए। वह अपनी पत्नी सह विधायक कल्पना सोरेन और पुत्र के साथ पहुंचे थे। हेमंत और कल्पना ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। समस्त झारखंड वासियों के कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने पूरे राज्यवासियों को सरहुल की बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्साह और हर्षोल्लास का दिन है। आदिवासी समुदाय के लिए आज एक बहुत बड़ा क्षण है। जिस प्रकार हमारे पूर्वजों ने हमें सरहुल महोत्सव जैसी समृद्ध परंपराओं के निर्वाह की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर दी है, हम आने वाले समय में अपनी पीढ़ी के कंधों पर इन परंपराओं के निर्वहन का जिम्मा सौंपेंगे। प्रकृति से बड़ी पूजा और कुछ नहीं है। प्रकृति में ही सभी चीजों का सृजन और विलय होता है।

प्रकृति है तो मानव मानव जीवन है
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर प्रकृति नहीं होता तो मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अगर प्रकृति ना होती, तो संसार में कोई जीव-जंतु भी नहीं होते। ये सभी प्रकृति के द्वारा रचाई और बसाई गई व्यवस्था है और इस व्यवस्था के प्रति आदिवासी समूह की अटूट आस्था है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से हम सभी को जुड़ने की जरूरत है। प्रकृति जब सुरक्षित रहेगी तब हमारा अस्तित्व भी रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में आपा-धापी के बीच जीवनयापन हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने हमें बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से दीर्घकालीन सोच के साथ कुछ ऐसी व्यवस्थाएं बनाई हैं जिसके तहत हम लोग एक साथ एक मंडप में एक छत के नीचे, एक पेड़ के नीचे एकत्रित होते हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को हमें प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। हम सभी लोग प्रकृति की रक्षा करें और अपने जीवन को सुरक्षित करें।
प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है:
सिरमटोली में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरहुल एक ऐसा पर्व है जो प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है। प्रकृति से ही मनुष्य की यात्रा शुरू होती और उसी में समाहित होती है। आज प्रकृति के उपासक के रूप में इसे सजाना-संवारना और इसको अपने साथ जोड़े रखने के लिए संकल्प लेने का दिन है। प्रकृति से ज्यादा ताकतवर व्यवस्था कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि सरहुल महोत्सव हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण और आपसी सौहार्द का संदेश देता है। राज्य सरकार आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक समरसता के प्रतीक इस पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
