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डिग्री के साथ अनुशासन और जिम्मेदारी को जीवन का हिस्सा बनाएं : उपराष्ट्रपति

डिग्री के साथ अनुशासन और जिम्मेदारी को जीवन का हिस्सा बनाएं : उपराष्ट्रपति

चेंगलपट्टू। चेंगलपट्टू जिले के कट्टांकुलत्तूर स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 22वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ अनुशासन, अच्छे आचरण और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सफलता के साथ युवाओं को देश के विकास में भी सक्रिय योगदान देना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री हासिल करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के अनुशासन, कार्यशैली और जीवन के प्रति दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम की शिक्षा डिग्री दिला सकती है, लेकिन जीवन में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए अनुशासन, अच्छा आचरण और जिम्मेदारी जरूरी है।

भारत की वैश्विक भूमिका का किया उल्लेख

सी.पी. राधाकृष्णन ने कोरोना महामारी के दौरान भारत के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में निर्मित दवाएं दुनिया के कई देशों तक पहुंचीं। भारत ने महामारी के दौरान अपने नागरिकों की जरूरतें पूरी करने के साथ अन्य देशों को भी आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराईं। उन्होंने कहा कि भारत के दवा और चिकित्सा क्षेत्र के योगदान की कई देशों ने सराहना की है।

उन्होंने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। देश को भविष्य में अग्रणी आर्थिक शक्ति बनाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह

उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से शराब और नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे की आदत युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक आदतें अपनाने, अच्छे व्यवहार और कानूनों का सम्मान करने की सलाह दी।

हर दिन कुछ नया सीखने का संदेश

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विश्वविद्यालय से डिग्री मिलने के साथ सीखने की प्रक्रिया समाप्त नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों को जीवनभर सीखते रहने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने प्रतिदिन कम से कम एक घंटा नई चीजें सीखने के लिए समर्पित करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी नई तकनीक, शोध, नवाचार या अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं से जुड़े विषयों पर नियमित रूप से सीख सकते हैं। बदलती दुनिया में लगातार ज्ञान और कौशल बढ़ाना युवाओं को नई चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।

अभिभावकों के योगदान की सराहना

उपराष्ट्रपति ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और उनकी सफलता में माता-पिता के समर्थन और प्रोत्साहन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी उपलब्धियों का उपयोग समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया।

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