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भारत बनेगा ग्लोबल डिफेंस हब! रक्षा निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव, कंपनियों को मिलेगी नई ताकत

भारत बनेगा ग्लोबल डिफेंस हब! रक्षा निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव, कंपनियों को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली। भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातक देशों की कतार में शामिल करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा निर्यात की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) के नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य भारतीय रक्षा कंपनियों को वैश्विक बाजार में तेजी से कारोबार करने और विदेशी रक्षा सौदों में प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर देना है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रक्षा उत्पादन विभाग ने डिफेंस एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और OGEL व्यवस्था में कई सुधार किए हैं। इनका मकसद अनावश्यक कागजी कार्रवाई और सरकारी प्रक्रियाओं को कम करना है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधान पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से उतरेंगी भारतीय कंपनियां

वैश्विक रक्षा बाजार में किसी टेंडर या कारोबारी अवसर पर तेजी से प्रतिक्रिया देना बेहद महत्वपूर्ण होता है। पहले कई मामलों में अलग-अलग स्तरों पर आवश्यक विचार-विमर्श के कारण निर्यात प्रक्रिया में समय लग जाता था।

नए बदलावों के तहत कई देशों को गैर-घातक रक्षा उपकरणों के निर्यात के लिए पहले वाली अनिवार्य प्रक्रिया को आसान किया गया है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनियों और टेंडर से जुड़े निर्यात में भी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इससे भारतीय कंपनियां विदेशी ग्राहकों और रक्षा बाजारों तक तेजी से पहुंच बना सकेंगी।

MSME कंपनियों के लिए बड़ी राहत

रक्षा क्षेत्र से जुड़ी छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है। बड़ी कंपनियों के पास निर्यात नियमों और लाइसेंस से जुड़े काम संभालने के लिए अलग संसाधन होते हैं, लेकिन MSME के लिए बार-बार मंजूरी और दस्तावेजी प्रक्रिया अतिरिक्त लागत पैदा करती है।

OGEL प्रक्रिया के आसान होने से रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, सुरक्षा उत्पाद, पुर्जे और अन्य संबंधित सामान बनाने वाली भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजार में प्रवेश करना आसान हो सकता है।

OGEL की वैलिडिटी अब तीन साल

सरकार ने OGEL की वैधता अवधि को भी बढ़ाया है। पहले जहां इसकी वैलिडिटी दो साल थी, वहीं अब इसे तीन साल कर दिया गया है। इससे कंपनियों को बार-बार लाइसेंस रिन्यू कराने की जरूरत कम होगी और प्रशासनिक बोझ घटेगा।

इसके साथ ही पहले अलग-अलग श्रेणियों के लिए मौजूद तीन OGEL SOP को मिलाकर एक सिंगल SOP तैयार किया गया है। इससे निर्यातकों के लिए नियमों को समझना और उनका पालन करना आसान होगा।

41 देशों की सीमा खत्म, बाजार का दायरा हुआ बड़ा

OGEL व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इसके भौगोलिक दायरे को लेकर किया गया है। पहले यह सुविधा 41 देशों तक सीमित थी, लेकिन अब इसका दायरा लगभग पूरी दुनिया तक बढ़ा दिया गया है।

हालांकि संवेदनशील देशों, प्रतिबंधित देशों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के दायरे वाले देशों को इससे बाहर रखा गया है।

इस बदलाव से भारतीय कंपनियों के लिए अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते रक्षा बाजारों में कारोबार के नए अवसर खुल सकते हैं।

विदेशी कंपनियों से लंबी साझेदारी का रास्ता साफ

नए प्रावधानों के तहत विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (OEM) के साथ लंबे समय के अनुबंध वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।

तय शर्तों को पूरा करने पर ऐसी कंपनियां संबंधित विदेशी साझेदार के लिए जरूरी रक्षा उपकरणों के निर्यात हेतु OGEL प्राप्त कर सकती हैं। लाइसेंस की वैधता भी संबंधित अनुबंध की अवधि के अनुरूप रखी जा सकती है।

इससे भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक रक्षा कंपनियों की सप्लाई चेन का हिस्सा बनने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

भारतीय रक्षा उत्पादों की कीमत भी हो सकती है प्रतिस्पर्धी

रक्षा निर्यात में सिर्फ उत्पाद की गुणवत्ता ही महत्वपूर्ण नहीं होती। कीमत, डिलीवरी की गति और नियामकीय प्रक्रिया भी बड़े कारक हैं।

बार-बार लाइसेंस और मंजूरी की जरूरत कम होने से कंपनियों की प्रशासनिक और ट्रांजैक्शन लागत घट सकती है। इसका फायदा विदेशी ग्राहकों को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत और तेज डिलीवरी के रूप में मिल सकता है।

उत्पादन का स्तर बढ़ने पर प्रति यूनिट लागत में भी कमी आने की संभावना है, जिससे भारतीय रक्षा उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में और आकर्षक हो सकते हैं।

रक्षा प्रदर्शनियों में बढ़ेगी भारत की मौजूदगी

अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनियां भारतीय कंपनियों के लिए सिर्फ उत्पाद दिखाने का मंच नहीं हैं। यहां विदेशी सेनाओं, खरीद एजेंसियों और बड़ी रक्षा कंपनियों के साथ कारोबारी रिश्ते विकसित किए जाते हैं।

भारत में निर्मित रडार, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, नौसैनिक उपकरण, मिसाइल सिस्टम, तोपखाने और सुरक्षा उपकरणों की वैश्विक मांग बढ़ाने के लिए इन मंचों की अहम भूमिका हो सकती है।

निर्यात प्रक्रिया आसान होने से भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और टेंडर में तेजी से भाग लेने का अवसर मिलेगा।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रक्षा उत्पादन

भारत का रक्षा उत्पादन भी लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन करीब ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात बढ़कर ₹38,424 करोड़ हो गया।

अब सरकार के सामने चुनौती उत्पादन क्षमता को स्थायी निर्यात वृद्धि में बदलने की है। नए निर्यात नियम इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

भारत की वैश्विक डिफेंस सप्लाई चेन में बढ़ेगी भूमिका

इन सुधारों का व्यापक असर सिर्फ हथियारों के निर्यात तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। भारतीय कंपनियां प्लेटफॉर्म, सब-सिस्टम, पुर्जे, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सेवाओं की वैश्विक सप्लाई चेन में भी अपनी भूमिका मजबूत कर सकती हैं।

सरकार का लक्ष्य भारत को केवल रक्षा उपकरण खरीदने वाले देश से आगे बढ़ाकर एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता बनाना है। OGEL में बदलाव और निर्यात प्रक्रिया का सरलीकरण इस दिशा में भारतीय रक्षा उद्योग को नई गति दे सकता है।

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