Skip to main content

Birsa Times

नवरात्रि का चौथा दिन: मां कूष्मांडा की पूजा, जानें विधि, मंत्र, आरती और प्रिय भोग

नवरात्रि का चौथा दिन: मां कूष्मांडा की पूजा, जानें विधि, मंत्र, आरती और प्रिय भोग

शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन बुधवार, 14 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि की रचना करने वाली देवी मानी जाती हैं। उनकी आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि आने की कामना की जाती है।

नवरात्रि के चौथे दिन भक्त विधि-विधान से मां की पूजा करते हैं और उन्हें मालपुए सहित विभिन्न प्रकार के मिष्ठान और मौसमी व्यंजनों का भोग अर्पित करते हैं। कई परंपराओं में कद्दू का भोग भी विशेष महत्व रखता है।

मां कूष्मांडा को क्यों कहते हैं सृष्टि की रचयिता?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा नवदुर्गा का चौथा स्वरूप हैं। मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।

मां कूष्मांडा का स्वरूप भक्तों को जीवन में उत्साह, सकारात्मकता और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उनकी पूजा कर श्रद्धालु सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना करते हैं।

मां कूष्मांडा को क्यों चढ़ाया जाता है मालपुए का भोग?

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित है। मालपुआ दूध, आटा, चीनी और घी से तैयार किया जाने वाला पारंपरिक मिष्ठान है। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार और श्रद्धालुओं के बीच बांटा जाता है।

कुछ क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं में मां को कद्दू या उससे बने व्यंजन भी अर्पित किए जाते हैं। हालांकि, भोग की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती है।

मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें?

नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर मां दुर्गा और मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करें।

  • मां को पुष्प, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
  • श्रद्धापूर्वक मां कूष्मांडा के मंत्र का जाप करें।
  • मालपुए, फल या अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तैयार भोग अर्पित करें।
  • मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
  • पूजा के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं और परिवार के सदस्यों में बांटें।

मां कूष्मांडा का मंत्र

मां की आराधना के दौरान श्रद्धालु इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति से मां की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मकता की अनुभूति होती है।

मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व

नवरात्रि का चौथा दिन शक्ति, सृजन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मां कूष्मांडा की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु जीवन में सुख, स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भोग अर्पित करने के साथ अपने आचरण में संयम और सद्भाव बनाए रखने का भी विशेष महत्व है।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *