विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय चीन के दौरे पर हैं और सोमवार को उन्होंने अपने चीनी समकक्ष वांग वाई से मुलाकात की। इस मुलाकात में जयशंकर ने चीन को स्पष्ट कर दिया है कि भारत ने पिछले दिनों जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने का जो फैसला किया है उसके बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी और नियंत्रण रेखा यानी एलओसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पिछले हफ्ते चीन ने इस बात पर चिंता जताई थी कि लद्दाख को एक संघ शासित प्रदेश घोषित करने के बाद क्षेत्र की स्थिति पर असर पड़ सकता है। चीन का कहना था कि संबधित पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है।विदेश मंत्री जयशंकर जब सोमवार को चीनी विदेश मंत्री से मिले तो उन्होंने चीन को साफ कर दिया कि हाल में भारत ने संविधान के तहत बदलाव का जो फैसला किया है, उसका भारत की बाहरी सीमाओं या फिर चीन से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही इस फैसले से लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। जयशंकर ने वांग को बताया भारत किसी भी तरह से किसी भी अतिरिक्त सीमा पर दावा नहीं कर रहा था और चीन की चिंताएं पूरी तरह से गलतफहमी से भरी हुई थीं। वांग ने जयशंकर के सामने जम्मू कश्मीर के विभाजन का मुद्दा जैसे ही उठाया, जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया कि यह पूरी तरह से भारत का आतंरिक मामला है।मुलाकात के दौरान चीनी विदेश मंत्री ने भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का जिक्र भी किया जो भारत के फैसले के बाद पैदा हुआ है। जयशंकर ने इस पर जवाब दिया कि यह पूरी तरह से भारत का आतंरिक मामला है और इसका पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। जयशंकर ने चीन से कहा कि वह अपने अनुमानों को वास्तविकता के आधार पर परखे। इसके साथ ही वांग को जयशंकर ने बताया कि भारत लगातार पाकिस्तान की भड़काऊ कार्रवाई के बाद भी संयम बरतता रहा है और आतंकवाद मुक्त माहौल में हमेशा रिश्तों को सामान्य करने की वकालत करता आया है। भारत सरकार की तरफ से चीन को दिया यह अब तक का यह सबसे कड़ा जवाब है जो आर्टिकल 370 और जम्मू कश्मीर के विभाजन के बाद आया है।
370 हटने के बाद चीन को भारत की खरी आर्टिकल
