देवघर:
झारखंड हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मोहनपुर अंचल के बाराकोला मौजा में स्थित सरकारी अहरा भूमि पर अवैध कब्जा अब भी नहीं हटा पाया है। लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर अंचल अधिकारी ने जांच रिपोर्ट डीसी को भेज दिया है। आज इस मामले की देवघर डीसी कोर्ट में सुनवाई होनी है, जिस पर पूरे बाराकोला के ग्रामीणों की निगाहें टिकी हुई हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अहरा पर अतिक्रमण के कारण सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। तालाब पर अतिक्रमण कर घर बना लिया गया है जिससे गांव में जल संकट बढ़ गया है। खेती-किसानी पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ग्रामीण इसे “जल, जंगल और जमीन” बचाने की सरकारी मुहिम के खिलाफ बड़ी चुनौती मान रहे हैं।
प्रशासन पर दबाव , कंटेंप्ट याचिका दायर करने के मूड में ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना हो रही है। आज डीसी कोर्ट में होने वाली सुनवाई में अतिक्रमणकारियों के दावों पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है। यदि आज भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं साथ ही हाई कोर्ट में कंटेंप्ट की याचिका दायर करने के मूड में है। स्थानीय ग्रामीणों की माने तो आदेश आने के एक वर्ष बाद भी प्रशासन ने अतिक्रमण नहीं हटवाया। ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हम सभी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और कंटेंप्ट याचिका दायर करेंगे। यह मामला जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। देखना होगा कि आज की सुनवाई के बाद सरकारी अहरा कब अतिक्रमणमुक्त होता है और ग्रामीणों को जल संकट से कब मुक्ति मिलती है।
क्या है पूरा मामला
मोहनपुर अंचल अंतर्गत बाराकोला मौजा में दाग संख्या-166 वाली 0.25 एकड़ सरकारी अहरा भूमि पर सुभाष मंडल व अन्य ने कथित तौर पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण कर लिया है। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायत पर जांच में अतिक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसके बाद कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने इसे हटाने की बजाय हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस भूमि को अपनी निजी बताने का दावा किया।झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर उपायुक्त को पुनः जांच कर सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने का स्पष्ट निर्देश दिया था। देवघर एसडीओ ने भी अतिक्रमण हटाने की तारीख तय की थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकारी संपत्ति पर कब्जा बरकरार है।
