लखीसराय/कजरा
डॉ आर लाल गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार
मध्य विद्यालय कजरा में विषय वार शिक्षकों का अभाव के चलते गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।
वर्ग प्रथम से पांचवीं वर्ग तक तो शिक्षक बहाल हैं परन्तु इससे ऊपर वर्ग यानी छठी, सातवीं एवं आठवीं कक्षा के लिए विभिन्न विषय हिंदी, गणित, संस्कृत,विज्ञान, अंग्रेजी,कंप्यूटर साइंस का एक भी शिक्षक पदस्थापित नहीं हैं मात्र सामाजिक विज्ञान का एक शिक्षक मनिंद्र शुक्ला की पदस्थापना है। ऐसे में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की कल्पना केवल कल्पना बन कर रह गई है।
शिक्षकों का अभाव, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा पर सवाल
जैसे अनेकों अस्पताल में अभी भी आयुर्वेदिक यूनानी होम्योपैथिक चिकित्सक अंग्रेज़ी दवा का लिखने की मजबूरी हैं,उसी तरह वर्ग एक से पांच तक के बहाल शिक्षक को छह से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाने की मजबूरी है। इसपर तुर्रा यह की शेष वर्गो के लिए कुल दस शिक्षक एक प्रधानाचार्य हैं। इस बाबत पूछने पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक शशि कांत कुमार ने बताया कि खुद का वर्ग संचालित करते हुए शिक्षको का समय बीत जाता है। इन स्थितियों में 6से 8 वर्ग के लिए समायाभाव के कारण कंबाइंड क्लास लेने होते हैं जो एक गड़ेरिया पर सौ भेड़ियों जैसा सम्हाल करना पड़ता है।
दूसरी ओर कस्तूरबा गांधी आवासीए विद्यालय के छात्राएं भी शामिल होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी व्यवस्था आज भी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के मामले में फिसड्डी है जिससे सरकारी विद्यालयों के बजाय निजी विद्यालय में अपने बच्चों को पढ़ाने की मजबूरी बनी हुई है। जबकि कंप्यूटर साइंस के शिक्षक के अभाव में अध्ययनरत बच्चे कंप्यूटर ज्ञान से संपूर्ण रूपेण वंचित है।
