शहडोल से राजेश कुमार यादव
शहडोल। खन्नौधी वन परिक्षेत्र के ग्राम जनौडी में दिनांक 11/4/26 को सुबह समय 6 बजे गेहू कटाई करते समय शेर के हमले का शिकार हुई निर्धन महिला उर्मिला यादव पति मुन्ना यादव उम्र 45 साल आज दो दिनों से जिला अस्पताल शहडोल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। लेकिन अफसोस, वन्य प्राणियों की सुरक्षा का दम भरने वाले वन विभाग का ‘मानवीय चेहरा’ इस आपदा में कहीं नजर नहीं आ रहा। घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से फूटी कौड़ी की सहायता राशि पीड़ित परिवार तक नहीं पहुँची है।
अस्पताल में बेबस परिजन, सो रहा विभाग
पीड़ित महिला का परिवार अत्यंत गरीब है। उनके पास अस्पताल में इलाज और दवाइयों के लिए नगद राशि का अभाव है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने घटना की जानकारी तत्काल विभाग को दी थी, लेकिन दो दिन बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी सुध लेने नहीं पहुँचा। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग केवल व पर चलता है? क्या किसी गरीब की जान की कीमत विभा। क लिए कुछ भी नहीं?
नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
नियमानुसार, वन्य प्राणी के हमले की स्थिति में वन विभाग को तत्काल ‘फौरी सहायता’ या ‘अंतरिम राहत’ (Interim Relief) के रूप में कुछ राशि प्रदान करनी चाहिए ताकि इलाज में बाधा न आए। लेकिन खन्नौधी वन परिक्षेत्र के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं।
ग्रामीणों में पनप रहा आक्रोश
ग्राम जनौडी और आसपास के क्षेत्र में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि एक तरफ जंगली जानवरों का डर है और दूसरी तरफ प्रशासन की यह बेरुखी। यदि जल्द ही सहायता राशि प्रदान नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
इनका कहना है
हमारे द्वारा एक हजार दे दिया गया है और अभी पैसा देने की प्रावधान नहीं है लास्ट में बिल देखकर पैसा मिलेगा
रेंजर भाग्यशाली सिंह खन्नौधी
