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मिलनाडु में सड़क हादसे में हंटरगंज के प्रवासी मजदूर की मौत

मिलनाडु में सड़क हादसे में हंटरगंज के प्रवासी मजदूर की मौत

रोजी-रोटी कमाने गया था चेन्नई, ट्रक की चपेट में आने से गई जान;
-चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, शव पहुंचते ही गांव में मचा कोहराम,
-मृतक ही पूरे परिवार का चलाता था खर्च
आदिवासी एक्सप्रेस / संतोष कुमार दास
चतरा :
चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत लेंजवा चिरैयाटांड़ गांव निवासी एक प्रवासी मजदूर की तमिलनाडु में सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान हरियर भुईयां के 38 वर्षीय पुत्र विफन भुइयां के रूप में हुई है। घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। शुक्रवार शाम जैसे ही उनका शव पैतृक गांव पहुंचा, गांव में कोहराम मच गया, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।परिजनों के अनुसार विफन भुइयां करीब एक माह पूर्व अपने कुछ साथियों के साथ रोजी-रोटी की तलाश में तमिलनाडु के चेन्नई गए थे। वहां एक निर्माणाधीन परियोजना में मजदूरी का कार्य कर रहे थे। बताया जाता है कि काम खत्म करने के बाद वह सड़क किनारे बने एक शेड में सो रहे थे। इसी दौरान एक अनियंत्रित ट्रक वहां पहुंच गया और उसकी चपेट में आने से उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। शव गांव पहुंचते ही पूरे लेंजवा चिरैयाटांड़ गांव में मातम छा गया। मृतक के माता-पिता बेसुध हैं, जबकि पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है ।विफन अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके निधन से चार मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है और परिवार गहरे आर्थिक संकट में आ गया है।घटना की जानकारी मिलते ही जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि बेचन पासवान तथा लेंजवा पंचायत के मुखिया योगेंद्र यादव मृतक के घर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि झारखंड के लिए पलायन एक अभिशाप बनता जा रहा है। रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले गरीब मजदूर लगातार दुर्घटनाओं और असमय मौत का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि मृतक के आश्रितों को शीघ्र उचित मुआवजा, सरकारी सहायता तथा चारों बच्चों की शिक्षा और भरण-पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।ग्रामीणों ने भी राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।उनका कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध होते तो मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ता। विफन भुइयां की मौत ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और पलायन की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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