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शराब कारोबारी की स्थानीय थाना में मजबूत पकड़ से अवैध महुआ शराब का निर्माण एवं बिक्री धड़ल्ले से जारी

शराब कारोबारी की स्थानीय थाना में मजबूत पकड़ से अवैध महुआ शराब का निर्माण एवं बिक्री धड़ल्ले से जारी

आदिवासी एक्सप्रेस फुल्लीडुमर
बांका।
बिहार में मध् निषेध कानून के तहत शराब की बिक्री, भंडारण, परिवहन एवं सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है। फिर भी शराबबंदी कानून पर सरकार एवं विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा सड़क से विधानसभा तक कई सवार खड़े किए जाते रहे हैं। कोई राजनेता शराबबंदी कानून की विफलताओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं तो कोई कानून की संवीक्षा की बात कर रहे हैं। वही सत्ता पक्ष इस कानून को जनता के हित में लाया गया कानून बता रहे हैं। फिर भी पूर्ण शराबबंदी कानून लागू रहने के बाद भी अवैध देशी विदेशी शराब की बिक्री धड़ल्ले से जा रही है। सूत्रों के अनुसार बांका जिले के फुल्लीडुमर थाना क्षेत्र के नाक के नीचे शराब माफियाओं एवं दलालों द्वारा स्थानीय थाना के पुलिस पदाधिकारी से डील कर प्रशासन की सहमति से अवैध देसी महुआ शराब का व्यापक पैमाने पर निर्माण, परिवहन एवं बिक्री का कार्य दिन के उजाले से रात के अंधेरे तक धड़ल्ले से जारी है। सूत्रों के अनुसार व्यापक पैमाने पर महुआ शराब के निर्माण से थाना क्षेत्र के जंगलों पर भी सामत आ गई है। शराब निर्माण करने को लेकर व्यापक पैमाने पर जंगलों से जलावन के नाम पर हरे पेड़ पौधे की धड़ल्ले से कटाई की जा रही है। जिससे थाना क्षेत्र के जंगलों का अस्तित्व खतरे में है। सूत्रों के अनुसार थाना क्षेत्र के नाक के नीचे के गांव फुल्लीडुमर बाजार, नयासी, ईटबा , दुधघटिया, जवाबहियार, चौड़ांड़, टेंगपाजा, भितिया सहित दर्जनों गांव के शराब कारोबारी स्थानीय थाना की सहमति से निडर होकर शराब का निर्माण अपने घर में करते हैं। जिससे कारोबारी की जहां चांदी कटती है वहीं पियक्कड़ों की संख्या में भी बेतहाशा वृद्धि हो रही है। इतना ही नहीं सूत्र यह भी बताते हैं कि शराब कारोबारी दलाल के माध्यम से प्रति माह एक मोटी रकम स्थानीय थाना को देती है‌। वहीं बार-बार खबर प्रकाशित होने से स्थानीय पुलिस कार्रवाई के नाम पर छोटे-छोटे शराब कारोबारी को पड़कर जेल भेज अपना पल्ला झाड़ देती हैं। लेकिन मैनेज रहने के कारण बड़े-बड़े शराब कारोबारी तक पुलिस की हाथ का नहीं पहुंच पाना कयी सवाल खड़े करते हैं। वहीं थाना क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि जिले के उत्पाद विभाग की टीम सुनियोजित एवं गुप्त तरीके से इस पर कार्रवाई करें तो कई बड़े-बड़े शराब माफिया पुलिस की गिरफ्त में होंगे।

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