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गोपीकांदर में जिला खनन टीम की बड़ी कार्रवाई: खटंगी गांव से 8 हजार सीएफटी अवैध बालू जब्त, माफियाओं में हड़कंप

गोपीकांदर में जिला खनन टीम की बड़ी कार्रवाई: खटंगी गांव से 8 हजार सीएफटी अवैध बालू जब्त, माफियाओं में हड़कंप

दुमका। गोपीकांदर थाना क्षेत्र के खटंगी गांव से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां जिला खनन टीम ने बालू माफियाओं के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए टीम ने खटंगी गांव के फुटबॉल मैदान में डंप कर रखे गए लगभग 8 हजार सीएफटी अवैध बालू को जब्त कर लिया है। इस छापेमारी अभियान का नेतृत्व जिला माइनिंग इंस्पेक्टर मंजीत दुबे और गौरव सिंह ने किया, जिसमें गोपीकांदर थाना की पुलिस बल ने भी मुख्य भूमिका निभाई। प्रशासन ने जब्त किए गए बालू को स्थानीय ग्राम प्रधान विकास हांसदा के सुपुर्द कर उन्हें जिमानामा सौंप दिया है।
माइनिंग इंस्पेक्टर गौरव सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें खटंगी और सिलंगी नदी से अवैध रूप से बालू का उठाव कर मैदान में जमा करने की पुख्ता जानकारी मिली थी। हालांकि, जब तक टीम मौके पर पहुंचती, तब तक माफिया और मजदूर वहां से भाग निकलने में कामयाब रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवैध बालू डंपिंग के पीछे शामिल सभी चेहरों को बेनकाब करने के लिए प्रशासन द्वारा चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट आगे की कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने के लिए जिला खनन पदाधिकारी तथा अन्य वरीय अधिकारियों को भेज दी गई है।
इस छापेमारी के दौरान बालू माफियाओं के बढ़े हुए हौसले और दुस्साहस का एक हैरान करने वाला रूप भी देखने को मिला। खनन टीम को रोकने के लिए माफियाओं ने खटंगी गांव से करीब दो किलोमीटर पहले ही मुख्य सड़क को दोनों तरफ से पेड़ और डालियां गिराकर पूरी तरह बंद कर दिया था। उनका मकसद टीम के रास्ते में बाधा डालना था ताकि उन्हें बालू डंप तक पहुंचने में देरी हो, लेकिन छापेमारी टीम ने सूझबूझ का परिचय दिया और दूसरे वैकल्पिक रास्ते से होते हुए खटंगी गांव पहुंचकर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
इस सफल कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्त रोक के बावजूद बालू माफिया इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन कैसे कर रहे हैं। ट्रकों और हाईवा के जरिए इस अवैध बालू को धड़ल्ले से बिहार और पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है, जिससे अब स्थानीय प्रखंड और जिला टास्क फोर्स टीम पर गंभीर सवालिया निशान उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक ऐसे अंतर्राज्यीय नेटवर्क पर लगाम नहीं कसी जाएगी, तब तक पूरी तरह से अवैध खनन को रोक पाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

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