संवाददाता राम कुमार
बालूमाथ। बालूमाथ शहर में भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर लंबे समय से आम लोगों के बीच नाराजगी और चिंता बनी हुई है।शहर की सड़कों पर दिनभर ट्रांसपोर्ट वाहनों की आवाजाही से जाम,दुर्घटना का खतरा,धूल धुआं और आम लोगों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा लगातार उठता रहा है। इसके बावजूद शहर में प्रभावी नो एंट्री व्यवस्था लागू नहीं हो पाने को लेकर अब जनता सवाल पूछ रही है। सांसद और विधायक को क्षेत्र के लोगों ने अपना प्रतिनिधि चुनकर लोकसभा और विधानसभा में भेजा है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मूलभूत समस्याओं और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।लेकिन बालूमाथ में भारी वाहनों के लिए नो एंट्री की मांग पर अपेक्षित पहल नहीं होने से लोगों में निराशा बढ़ रही है।ग्रामीणों जनता का आरोप है कि जब जनता अपनी मांग को लेकर आंदोलन या विरोध का रास्ता अपनाती है,तो विभिन्न परिस्थितियों में प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आम लोगों का सवाल है कि आखिर वे अपनी समस्या लेकर जाएं तो जाएं कहां।लोगों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट कारोबार महत्वपूर्ण हो सकता है,लेकिन जनता की सुरक्षा,शहर की व्यवस्था और आम नागरिकों की सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जनता चाहती है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर बालूमाथ शहर में भारी वाहनों के लिए उचित समय निर्धारित करते हुए प्रभावी नो एंट्री व्यवस्था लागू कराने की दिशा में ठोस पहल करें।
जनता किसको सुनाए अपना दर्द, बालूमाथ में कब लागू होगी नो एंट्री व्यवस्था
