नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर निर्वाचन आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने कहा है कि फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों में से किसी को भी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के मौजूदा चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार, दोनों गुटों को अपने लिए अलग-अलग नाम चुनने होंगे और उपचुनाव के लिए अलग चुनाव चिह्न भी आवंटित किए जाएंगे। आयोग ने दोनों पक्षों को शुक्रवार सुबह तक तीन-तीन पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
दोनों गुटों के लिए अलग नाम और सिंबल
आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि अरूप रॉय की ओर से दायर याचिका और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले पक्ष के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर उठे विवाद के मद्देनजर किसी भी गुट को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
दोनों समूह अपने लिए अलग-अलग नाम प्रस्तावित करेंगे। इसके साथ ही उन्हें चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित फ्री सिंबल की सूची में से अलग-अलग चुनाव चिह्न चुनने होंगे। यह व्यवस्था मौजूदा पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों के लिए लागू होगी।
उपचुनाव से पहले बढ़ा नाम-सिंबल विवाद
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। इससे पहले टीएमसी के दोनों गुटों के प्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात की थी।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से आयोग के समक्ष पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पेश हुआ। इसमें डेरेक ओ’ब्रायन, कल्याण बनर्जी, सागरिका घोष, साकेत गोखले और अधिवक्ता अभिनव सिंह शामिल थे।
ममता बनर्जी गुट की ओर से आयोग को दिए गए बयान में कहा गया कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर कोई विवाद नहीं है। साथ ही, विरोधी गुट की ओर से किए गए दावों पर भी सवाल उठाए गए।
वहीं, दोनों पक्षों के बीच विवाद पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों से जुड़े दावों को लेकर सामने आया है। चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश फिलहाल उपचुनावों के दौरान दोनों गुटों के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर तत्काल व्यवस्था तय करता है।
