नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे विख्यात पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे देश के लोकतंत्र और संविधान पर एक बड़ा धब्बा बताया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चाहे मां गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन करने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल हों, हरियाणा की महिला पहलवान हों, किसान, दलित-आदिवासी हों या फिर पेपर लीक से परेशान छात्र, इस सरकार ने अपनी आवाज उठाने वाले किसी भी वर्ग को नहीं बख्शा है। खरगे ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की नजर में अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने वाला हर व्यक्ति ‘देशद्रोही’ या ‘परजीवी’ बना दिया जाता है। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुई इस कार्रवाई को लोकतंत्र के इतिहास में एक और काला धब्बा करार दिया।
दूसरी तरफ, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर फासीवादी तरीके से शांतिपूर्ण विरोध को कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को संवेदनशीलता और करुणा दिखाते हुए प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत सोनम वांगचुक को उनके धरना स्थल से जबरन हटा दिया गया। वेणुगोपाल ने शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा और मांग की कि आगामी मानसून सत्र शुरू होने से पहले उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली पुलिस का रुख भी सामने आया है। पुलिस प्रशासन के मुताबिक, उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए और सोनम वांगचुक के लगातार गिरते स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही उन्हें इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान धरना स्थल पर मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली।
