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आस्था पर गंदगी का दाग: कौलेश्वरी मंदिर का हटवरिया द्वार बना शराबियों का अड्डा,

आस्था पर गंदगी का दाग: कौलेश्वरी मंदिर का हटवरिया द्वार बना शराबियों का अड्डा,

कौलेश्वरी प्रबंधन समिति और पुलिस-प्रशासन पर उठे सवाल,

धार्मिक स्थल की गरिमा पर चोट

आदिवासी एक्सप्रेस / संतोष कुमार दास

चतरा : जिले के हंटरगंज प्रखंड में स्थित प्रसिद्ध मां कौलेश्वरी मंदिर तीन धर्मों के संगम स्थल के रूप में देश-विदेश में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां सप्ताह के सातों दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और प्रतिदिन सैकड़ों महिला एवं पुरुष भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद यह धार्मिक स्थल आज भी कई मूलभूत समस्याओं और प्रशासनिक उपेक्षा का सामना कर रहा है।मंदिर पहाड़ के नीचे स्थित मुख्य प्रवेश द्वार हटवरिया के आसपास बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक कचरा और गंदगी फैली हुई है। वहां की तस्वीरें स्वयं इस बात की गवाही देती हैं कि लंबे समय से इस क्षेत्र में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम ढलते ही कुछ लोग पूजा-अर्चना के बहाने यहां पहुंचते हैं और मुख्य द्वार के आसपास बैठकर शराब का सेवन करते हैं। इसके बाद वे खाली बोतलें और अन्य कचरा वहीं छोड़कर चले जाते हैं, जिससे धार्मिक स्थल की पवित्रता और गरिमा प्रभावित हो रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय प्रशासन को इस स्थिति की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। यही कारण है कि असामाजिक तत्वों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह क्षेत्र श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए मुख्य मार्ग है, बावजूद इसके यहां नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था का अभाव देखने को मिलता है।श्रद्धालुओं का कहना है कि एक ओर सरकार धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों पर गंदगी और अव्यवस्था प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। लोगों ने सवाल उठाया है कि पुलिस गश्ती और निगरानी व्यवस्था होने के बावजूद इस प्रकार की गतिविधियां आखिर कैसे जारी हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और मंदिर प्रबंधन समिति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए क्षेत्र में नियमित सफाई अभियान चलाने, सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा शराब सेवन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि मां कौलेश्वरी मंदिर की गरिमा और पवित्रता बरकरार रह सके।
मुख्य द्वार के पास लगा हाई मास्ट लाइट बना शोभा की वस्तु
स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर के मुख्य द्वार के समीप लगाया गया हाई मास्ट लाइट लंबे समय से खराब पड़ा हुआ है। शाम होते ही मुख्य द्वार का इलाका अंधेरे में डूब जाता है, जिससे असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी बड़ी दुर्घटना को भी आमंत्रित कर सकती है। उन्होंने संबंधित विभाग और मंदिर प्रबंधन समिति से शीघ्र हाई मास्ट लाइट को चालू कराने की मांग की है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव, श्रद्धालु परेशान
मंदिर परिसर में साफ-सफाई, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव देखा जा रहा है। यहां बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु पहुंचती हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। परिसर में बना शौचालय भी अधिकांश समय बंद रहने की शिकायत सामने आती रही है, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंदिर को सालाना लाखों की आमदनी, फिर भी व्यवस्था बदहाल
मां कौलेश्वरी मंदिर की आय के कई स्रोत हैं। मंदिर परिसर में आने वाले वाहनों से प्रवेश शुल्क भी लिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस आय का उपयोग मंदिर के रखरखाव, साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं के विकास पर किया जाना चाहिए। हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पर्याप्त आय होने के बावजूद मंदिर परिसर की व्यवस्था में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। लोगों ने मंदिर प्रबंधन समिति से आय और खर्च का विवरण सार्वजनिक करने तथा व्यवस्थाओं में सुधार लाने की मांग की है।
किया कहते हैं कौलेश्वरी प्रबंधन समिति के सचिव सह अंचल अधिकारी
इधर कौलेश्वरी मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव सह हंटरगंज अंचल अधिकारी रितिक कुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि मंदिर परिसर और मुख्य द्वार के आसपास अवैध रूप से शराब सेवन करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखना समिति की प्राथमिकता है और इस तरह की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि मुख्य द्वार के पास लगा हाई मास्ट लाइट खराब है। उन्होंने बताया कि जल्द ही हाई मास्ट लाइट को दुरुस्त कर पुनः चालू कराया जाएगा, ताकि क्षेत्र में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके और असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। साथ ही मंदिर परिसर की साफ-सफाई और अन्य आवश्यक सुविधाओं में भी सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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