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भारत-न्यूजीलैंड के संबंधों को नई दिशा देने में डेविड लैंग की रही थी महत्वपूर्ण भूमिकाः जयराम रमेश

भारत-न्यूजीलैंड के संबंधों को नई दिशा देने में डेविड लैंग की रही थी महत्वपूर्ण भूमिकाः जयराम रमेश

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने न्यूजीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड लैंग को याद करते हुए कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को नई दिशा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में डेविड लैंग के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आई और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती मिली।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा कि डेविड लैंग जुलाई 1984 से 1989 तक न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री रहे और अक्टूबर 1984 में उनका पहला विदेश दौरा भारत का था। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए और बाद में राजीव गांधी के साथ भी उनका व्यक्तिगत रिश्ता काफी मजबूत रहा।

उन्होंने कहा कि डेविड लैंग के पुत्र रॉय लैंग का भारत से विशेष जुड़ाव रहा। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में भारतीय मूल की मीता भौमिक से विवाह किया, जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में एक जानी-मानी फिल्म निर्माता हैं।

रमेश ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच 1950 के दशक में मजबूत सहयोग रहा था। उस दौर में न्यूजीलैंड ने भारत के डेयरी क्षेत्र के विकास में सहायता की थी और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना में भी सहयोग दिया था। भारत की श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन को 1952-53 में भारत सरकार ने फेलोशिप पर न्यूजीलैंड भेजा था, जहां के अनुभवों ने उनके कार्यों को गहराई से प्रभावित किया।

उन्होंने कहा कि 1960 और 1970 के दशक में दोनों देशों के संबंध अपेक्षाकृत धीमे पड़ गए थे, लेकिन डेविड लैंग के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्तों में नई गर्माहट आई। इसी क्रम में उन्होंने पर्वतारोही सर एडमंड हिलेरी को भारत में न्यूजीलैंड का उच्चायुक्त नियुक्त किया। नई दिल्ली के कूटनीतिक क्षेत्र में एक सड़क का नाम एडमंड हिलेरी के नाम पर है, जबकि दूसरी सड़क का नाम तेनजिंग नोर्गे के सम्मान में रखा गया है। दोनों ने 29 मई 1953 को पहली बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर इतिहास रचा था।

रमेश ने कहा कि डेविड लैंग का कार्यकाल भारत-न्यूजीलैंड संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाता है।

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