शिकारीपाड़ा/दुमका/
आदिवासी एक्सप्रेस।
दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों अवैध लॉटरी का कारोबार पूरी तरह से पैर पसार चुका है। क्षेत्र के बेनागड़िया, राजबांध समेत दर्जनों गांवों में बिना किसी खौफ के धड़ल्ले से अवैध लॉटरी की खरीद-बिक्री की जा रही है। रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाकर यह अवैध धंधा स्थानीय सीधे-साधे और गरीब मजदूर वर्ग के लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
इस गोरखधंधे का सबसे बुरा असर स्थानीय दिहाड़ी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है। सुबह से शाम तक कड़ी धूप और मेहनत के बाद मिलने वाली मजदूरी का एक बड़ा हिस्सा ये मजदूर लॉटरी के टिकट खरीदने में गंवा रहे हैं। चंद रुपयों के लालच में अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने के कारण अब कई घरों में चूल्हा जलना तक मुश्किल हो गया है, जिससे परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो रही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन गांवों में लॉटरी माफियाओं का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है, जो पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचकर या उनकी लापरवाही का फायदा उठाकर इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा है। सुबह होते ही बेनागड़िया , सरसडंगाल, राजबांध आदि प्रमुख चौक-चौराहों और चाय-पान की गुमटियों पर लॉटरी टिकट बेचने वाले सक्रिय हो जाते हैं। कम पैसों में बंपर प्राइज जीतने का झांसा देकर ये एजेंट मजदूरों की जेब खाली कर रहे हैं।
इस स्थिति से स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध धंधे के कारण क्षेत्र में अपराध और पारिवारिक कलह की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। लोगों ने जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस से गुहार लगाई है कि बेनागड़िया, राजबांध सहित पूरे शिकारीपाड़ा क्षेत्र में छापेमारी कर इस अवैध लॉटरी सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाए और इस काले कारोबार के मुख्य सरगनाओं को सलाखों के पीछे भेजा जाए, ताकि गरीब मजदूरों की मेहनत की कमाई को लुटने से बचाया जा सके।
