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जमुआ: भाटडीह गोदाम से राशन की कथित निकासी पर बवाल, पकड़े गए ट्रक थाने से छोड़े जाने पर उठे सवाल

जमुआ: भाटडीह गोदाम से राशन की कथित निकासी पर बवाल, पकड़े गए ट्रक थाने से छोड़े जाने पर उठे सवाल

गिरिडीह। जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत भाटडीह स्थित झारखंड खाद्य निगम के गोदाम से कथित रूप से कालाबाजारी के लिए राशन की निकासी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए चावल लदे ट्रकों को थाना से छोड़ दिए जाने के बाद क्षेत्र की राजनीति गरमा गई है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार शुक्रवार की दोपहर ग्रामीणों को सूचना मिली कि भाटडीह गोदाम से रात के अंधेरे और गोपनीय तरीके से चावल लदे ट्रकों को बाहर भेजा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने ट्रकों की आवाजाही पर आपत्ति जताई, तब भी चावल की निकासी जारी रही। बताया जाता है कि एक ट्रक पहले ही गोदाम से निकल चुका था, जबकि दो अन्य ट्रकों में चावल लोड किया जा रहा था। इसकी सूचना मिलते ही विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी जमुआ के बीडीओ तथा जिला आपूर्ति पदाधिकारी को दी। जिला आपूर्ति पदाधिकारी के निर्देश पर जमुआ प्रखंड विकास पदाधिकारी ने चावल लदे ट्रकों को जमुआ थाना के सुपुर्द करा दिया। लेकिन शनिवार को उन्हीं ट्रकों को थाना से छोड़ दिए जाने की खबर फैलते ही ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश की लहर दौड़ गई। लोगों का कहना है कि जिस मामले में गंभीर अनियमितता की आशंका जताई जा रही थी, उसमें बिना स्पष्ट जांच और सार्वजनिक जानकारी के ट्रकों को छोड़ना कई सवालों को जन्म देता है। मामले को लेकर जमुआ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में प्रमुख प्रतिनिधि संजीत यादव, उप प्रमुख रब्बुल हसन रब्बानी, झामुमो के जिला सह सचिव चीना खान, बीस सूत्री अध्यक्ष जुनैद आलम, प्रखंड अध्यक्ष रंजीत राम, कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष अहमद रजा नूरी, झामुमो नेता बैजू यादव, गौतम सागर राणा, महेंद्र यादव, केदार यादव, प्रमोद वर्मा और पंकज यादव सहित कई नेताओं ने प्रशासन के रवैये पर कड़ा एतराज जताया। नेताओं ने सवाल उठाया कि जब गोदाम के एजीएम मदन मोहन सिंह दो दिनों की छुट्टी पर थे, तब चावल का वितरण या निकासी किसके आदेश पर की जा रही थी, जो ट्रक पहले गोदाम से बाहर निकला, वह कहां गया? उसमें लदा चावल किसे सौंपा गया? थाना में जब्त किए गए ट्रकों को किस आधार पर छोड़ा गया और उन्हें कहां भेजा गया? इन तमाम प्रश्नों का जवाब प्रशासन को जनता के सामने रखना चाहिए। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े खाद्यान्न गरीबों के अधिकार से जुड़ा संवेदनशील विषय है। ऐसे में यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों तथा संबंधित लोगों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की पारदर्शी जांच नहीं हुई तो जनता के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल भाटडीह गोदाम से चावल निकासी और ट्रकों को छोड़े जाने का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है तथा लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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