रिपोर्टर महेन्द्र कुमार गौतम जालौन 8542832748
माधौगढ़ विधानसभा 219 में इस बार राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी द्वारा ब्राह्मण चेहरे के रूप में आशीष पांडे को आगे किए जाने के बाद अब क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बिना मजबूत जनाधार और क्षेत्रीय सक्रियता के कोई नया चेहरा इतनी बड़ी विधानसभा में प्रभाव बना पाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि माधौगढ़ विधानसभा केवल जातीय समीकरणों से नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, जनसंपर्क और क्षेत्रीय पकड़ से जीती जाती रही है। ऐसे में आशीष पांडे को लेकर यह सवाल लगातार उठ रहे हैं कि आखिर क्षेत्र में उनकी पहचान कितनी मजबूत है और क्या स्थानीय जनता उन्हें अपना नेता मानने के लिए तैयार है।
क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि विधानसभा में लंबे समय से सक्रिय रहे स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज कर अचानक नए चेहरे को सामने लाना पार्टी संगठन के भीतर नाराजगी बढ़ा सकता है। खासकर बहुजन समाज पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर चर्चा है कि वर्षों से मेहनत कर रहे नेताओं को महत्व न देकर बाहरी या कम सक्रिय चेहरे पर भरोसा करना कितना सही फैसला साबित होगा।
ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश में बसपा का यह दांव कितना कारगर होगा, यह आने वाला समय तय करेगा। क्योंकि स्थानीय स्तर पर अभी तक आशीष पांडे की बड़ी राजनीतिक पकड़ दिखाई नहीं दे रही है। न बड़े जनआंदोलन, न मजबूत संगठनात्मक उपस्थिति और न ही लगातार क्षेत्रीय सक्रियता यही बातें विरोधियों को हमला करने का मौका दे रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि प्रत्याशी का स्थानीय जनता से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत न हो तो चुनावी लड़ाई कठिन हो जाती है। जनता अब केवल जाति नहीं बल्कि क्षेत्र में काम, पहुंच और संघर्ष देखने लगी है। यही कारण है कि बसपा के इस फैसले को लेकर गांवों और कस्बों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
दूसरी तरफ भाजपा और समाजवादी पार्टी पहले से ही मजबूत संगठन और सक्रिय नेताओं के सहारे चुनावी तैयारी में जुटी हुई हैं। ऐसे में बसपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने वोट बैंक को बचाए रखने की होगी। यदि दलित और बहुजन वोट पूरी तरह एकजुट नहीं हुए तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वहीं आजाद समाज पार्टी की बढ़ती सक्रियता भी बसपा के लिए चिंता का विषय बनती दिखाई दे रही है। दलित युवाओं का एक वर्ग नए विकल्प की ओर देख रहा है, जिसका असर आने वाले चुनाव में दिखाई दे सकता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आशीष पांडे जनता के बीच अपनी पहचान और मजबूत पकड़ बना पाते हैं या विरोधियों के सवाल उनके चुनावी सफर को मुश्किल बना देंगे। फिलहाल माधौगढ़ विधानसभा में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में सियासी हलचल और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
